
दिल्ली। पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) नवंबर 2022 से जीवन प्रमाण-पत्र जमा करने की प्रक्रिया के डिजिटलीकरण के लाभों को पेंशनभोगियों तक पहुंचाने हेतु डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र अभियान चला रहा है। यह पहल पेंशनभोगियों, विशेष रूप से अति वरिष्ठ/बीमार/दिव्यांग पेंशनभोगियों के जीवन को सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस उद्देश्य को साकार करने हेतु, देश भर के चिन्हित शहरों में हर वर्ष 1 से 30 नवंबर तक शिविर आयोजित किए जाते हैं। इस अभियान का उद्देश्य देश के सुदूरतम क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनभोगियों तक पहुंचना है।
डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (डीएलसी) अभियान 4.0 का शुभारंभ 5 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मीडिया केन्द्र में माननीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा किया गया और इसका संचालन माननीय राज्यमंत्री के नेतृत्व में किया गया।
इस अभियान में 19 बैंकों, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी), रक्षा लेखा महानियंत्रक, डाक विभाग, रेलवे, डीओटी, ईपीएफओ, यूआईडीएआई, एमईआईटीवाई और 57 पेंशनभोगी कल्याण संघों सहित कई हितधारकों का सहयोग शामिल था।
विभाग ने 1 से 30 नवंबर, 2025 तक आयोजित डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) अभियान 4.0 का सफलतापूर्वक समापन किया। इसमें नवीन तकनीकों का लाभ उठाते हुए और सभी हितधारकों के व्यापक सहयोग से महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गईं। इस अभियान के दौरान, देशभर के 2000 शहरों एवं जिलों में 75000 शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में 1400 से अधिक नोडल अधिकारियों ने सुचारू संचालन सुनिश्चित किया, तकनीकी चुनौतियों का समाधान किया और डीएलसी जमा करने की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने में सहायता प्रदान की। पेंशनभोगियों की सहायता और उन्हें घर पर सेवा प्रदान करने हेतु 1.8 लाख पोस्टमैन/डाक सेवक तैनात किए गए।
1 अप्रैल, 2025 से 31 मार्च, 2026 तक की अवधि में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गईं, जो इस बात का संकेत है कि यह अभियान भारत में पेंशनभोगियों के बेहतर कल्याण हेतु चलाया गया अब तक का सबसे बड़ा अभियान है।
प्रमुख उपलब्धियां
• इस अवधि के दौरान 1.91 करोड़ से अधिक डीएलसी बनाए गए, जो पेंशनभोगियों के डिजिटल सशक्तिकरण में वृद्धि, डिजिटलीकरण को आसानी से अपनाने और पेंशनभोगियों द्वारा डिजिटल प्रक्रियाओं को सहजता से स्वीकार करने को रेखांकित करता है। यह उल्लेखनीय उपलब्धि पेंशनभोगियों के बीच आधार-आधारित डिजिटल सत्यापन की बढ़ती स्वीकृति को भी दर्शाती है।
• 1.16 करोड़ से अधिक डीएलसी (60 प्रतिशत) फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का उपयोग करके बनाए गए, जो डीएलसी 3.0 अभियान की तुलना में 220 गुना अधिक है। यह अभूतपूर्व तकनीक विशेष रूप से उन बुजुर्ग पेंशनभोगियों के लिए लाभदायक साबित हुई जिनके फिंगरप्रिंट धुंधले पड़ गए हैं और जो चलने-फिरने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनभोगियों को घर पर सेवा से बहुत लाभ हुआ, जिससे एलसी जमा करने हेतु लंबी दूरी तय करने की जरूरत और असुविधा के बिना वे अपने घरों में आराम से डीएलसी पा सके।
• देश भर में पेंशनभोगियों तक पहुंचने हेतु घर पर सेवाएं प्रदान करने, ऑपरेटरों को प्रशिक्षण देने और एक केन्द्रित दृष्टिकोण अपनाने से 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के पेंशनभोगियों द्वारा बड़ी संख्या में डीएलसी जमा किए गए हैं। अति वरिष्ठ पेंशनभोगियों द्वारा 14 लाख से अधिक डीएलसी जमा किए गए हैं। बैंकों, आईपीपीबी और पेंशनभोगी कल्याण संघों ने वृद्ध/बीमार/दिव्यांग पेंशनभोगियों को घर पर सेवाएं प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभाई।
• इस अभियान का उद्देश्य देश भर में व्यापक कवरेज प्रदान करना था, ताकि सुदूरतम क्षेत्रों में भी पेंशनभोगियों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके और विशेष रूप से सेवाओं से वंचित आबादी पर ध्यान केन्द्रित किया जा सके। विभिन्न हितधारकों के साथ सहयोग और समग्र सरकार के दृष्टिकोण ने एक सार्वभौमिक मॉडल तैयार किया, जिससे व्यापक पहुंच संभव हुई।
• मीडिया के जरिए व्यापक प्रचार-प्रसार से जागरूकता बढ़ी और देशभर में 2 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचा गया। डीडी न्यूज, संसद टीवी और आकाशवाणी पर पैनल चर्चा/स्पॉटलाइट कार्यक्रमों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर मानक संचालन प्रक्रियाओं/लघु फिल्मों के जरिए व्यापक प्रचार संभव हुआ।
• इस अभियान में पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य जांच, आधार कार्ड अपडेट एवं शिकायत निवारण जैसे कल्याणकारी सेवाओं का एक युग्म शामिल था, जिन्हें विभिन्न शिविरों में पेंशनभोगियों के लिए आयोजित किया गया था।
• दैनिक रिपोर्टों वाले एक राष्ट्रीय डीएलसी पोर्टल ने सेवाओं से वंचित रहने वाले क्षेत्रों में पेंशनभोगियों तक लक्षित पहुंच के साथ निरंतर निगरानी को संभव बनाया।
विभिन्न अभियानों के दौरान हासिल उपलब्धियां
• डीएलसी 1.0 (2022): 37 शहरों को कवर किया गया, 91 लाख जीवन प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया पूरी की गई (मार्च 2023 तक 1.41 करोड़ डीएलसी)।
• डीएलसी 2.0 (2023): 100 शहरों तक विस्तारित किया गया, 1.17 करोड़ डीएलसी बनाए गए (मार्च 2024 तक 1.47 करोड़ डीएलसी)।
• डीएलसी 3.0 (2024): 845 शहरों को कवर किया गया, 1.30 करोड़ डीएलसी बनाए गए (मार्च 2025 तक 1.62 करोड़ डीएलसी)।
• डीएलसी 4.0 (2025): 2000 शहरों को कवर किया गया, 1.19 करोड़ डीएलसी बनाए गए (31 मार्च 2026 तक 1.91 करोड़ से अधिक डीएलसी के साथ उल्लेखनीय सफलता हासिल की गई)।
बैंकों और आईपीपीबी की भूमिका: अभियान की सफलता के प्रमुख स्तंभ
डीएलसी अभियान 4.0 की सफलता में एसबीआई, पीएनबी और आईपीपीबी जैसे प्रमुख बैंकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने क्रमशः 25.99 लाख, 3.78 लाख और 3.64 लाख डीएलसी जमा किए। इन बैंकों ने 300 शहरों और 1,250 से अधिक स्थानों पर विशेष शिविर आयोजित किए, जिससे डिजिटल संसाधनों तक सीमित पहुंच वाले पेंशनभोगियों को सहायता प्रदान की गई। उनके प्रयासों से यह सुनिश्चित हुआ कि स्मार्टफोन या इंटरनेट कनेक्टिविटी से वंचित पेंशनभोगी भी आसानी से अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकें। कुल मिलाकर, पेंशन वितरित करने वाले बैंकों ने सामूहिक रूप से अपने लक्ष्य का 63 प्रतिशत से अधिक हासिल किया, जो डीएलसी अभियानों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
राज्यों के बीच डीएलसी का वितरण
• महाराष्ट्र: सशक्त समन्वय और जन जागरूकता अभियानों के माध्यम से 25.86 लाख डीएलसी प्राप्त किए गए।
• उत्तर प्रदेश: 15.93 लाख डीएलसी पूरे किए गए, जिससे सुदूरतम क्षेत्रों में भी पहुंच सुनिश्चित हुई।
• तमिलनाडु: नवीन प्रचार रणनीतियों के जरिए 15.31 लाख डीएलसी प्राप्त किए गए।
• कर्नाटक: 13.08 लाख डीएलसी जमा किए गए।


