
दिल्ली। भारत सरकार की एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना, अटल पेंशन योजना (एपीवाई), जो पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा प्रशासित है, ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 9 करोड़ अभिदाताओं के कुल सकल नामांकन का आंकड़ा अप्रैल 21, 2026 तारीख़ को पार कर लिया है।
वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान सकल नामांकन 1.35 करोड़ अभिदाताओं से अधिक हो गया है, जो कि योजना की शुरुआत से अब तक किसी एक वित्त वर्ष में दर्ज किया गया सर्वाधिक नामांकन है जो कि योजना की बढ़ती पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है।
सभी भारतीयों के लिए एक सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली स्थापित करने के उद्देश्य से दिनांक 9 मई, 2015 को प्रारंभ की गई एपीवाई एक स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना है, जो विशेष रूप से गरीब, वंचित तथा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर केंद्रित है। पिछले एक दशक में, इस योजना ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है, जो बैंकों (पीएसबी/आरआरबी/निजी बैंक/एसएफबी/सहकारी बैंक), राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी)/केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय बैंकर्स समिति (यूटीएलबीसी)/लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम), डाक विभाग (डीओपी) के निरंतर प्रयासों तथा भारत सरकार के सतत सहयोग का परिणाम है। पीएफआरडीए ने भी जन-जागरूकता अभियानों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, बहुभाषी सामग्री, मीडिया प्रचार और नियमित समीक्षाओं के माध्यम से देश के सभी राज्यों और जिलों में योजना के विस्तार में सक्रिय भूमिका निभाई है।
अटल पेंशन योजना को ‘सम्पूर्ण सुरक्षा कवच’ प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, जिसके अंतर्गत निम्नलिखित त्रिस्तरीय लाभ सुनिश्चित किए जाते हैं :- प्रथम, 60 वर्ष की आयु के पश्चात ₹1,000 से ₹5,000 तक की गारंटीकृत मासिक पेंशन सुनिश्चित की जाती है ; द्वितीय, अभिदाता की मृत्यु के पश्चात उसके पति/पत्नी को समान पेंशन राशि मिलना जारी रहती है तथा तृतीय,दोनों के निधन के बाद 60 वर्ष की आयु तक संचित कोष नामित व्यक्ति को लौटा दिया जाता है। यह योजना 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के सभी भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध है, बशर्ते वे आयकरदाता न हों या पूर्व में आयकरदाता न रहे हों।

