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नशा मुक्त भारत अभियान देश भर में 29.05 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचा

दिल्ली। भारत सरकार ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ (एनएमबीए) को एक देशव्यापी अभियान के तौर पर लागू कर रही है। इसका उदे्श्य जागरूकता फैलाकर, समुदाय की भागीदारी से और नशा-मुक्ति के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाकर नशीले पदार्थों के सेवन को रोकना और कम करना है। 15 अगस्त 2020 को नशीले पदार्थों के सेवन के प्रति संवेदनशील 272 जिलों में शुरू किए गए इस अभियान का दायरा अगस्त 2023 से देश के सभी जिलों तक बढ़ा दिया गया है। इसमें उच्च शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और स्कूलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा ने राज्यसभा में श्री कनाद पुरकायस्थ और श्री बाबूभाई जेसंगभाई देसाई द्वारा पूछे गए प्रश्नों के लिखित उत्तर में ये जानकारी दीं। सदन को बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगातार सहयोग से, ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ ने देश भर में बड़े पैमाने पर जागरूकता और पहुंच बढ़ाने वाली गतिविधियों के ज़रिए 29.05 करोड़ से ज़्यादा लोगों तक पहुंच बनाई है और उन्हें जागरूक किया है। इनमें 11.05 करोड़ से ज़्यादा युवा और 7.81 करोड़ महिलाएं शामिल हैं।

लिखित उत्तर में यह भी बताया गया कि मादक पदार्थों की मांग में कमी के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीआरडीआर) के तहत, मंत्रालय वर्तमान में 145 जिला नशा मुक्ति केंद्रों (डीडीएसी), 344 एकीकृत पुनर्वास केंद्रों (आईआरसीए), 76 आउटरीच और ड्रॉप-इन केंद्रों (ओडीआईसी), 45 समुदाय-आधारित पीयर-लेड इंटरवेंशन (सीपीएलआई) केंद्रों और 155 व्यसन उपचार सुविधा केंद्रों (एटीएफ) को सहायता दे रहा है। डीडीएसी ढांचा इन सेवाओं को एक एकीकृत जिला-स्तरीय प्रणाली में जोड़ता है, जिससे संस्थागत देखभाल सुदृढ़ होती है और पुनर्वास सेवाओं तक पहुंच बेहतर होती है।

सदन को यह भी सूचित किया गया कि मंत्रालय ने मादक पदार्थों के सेवन से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों को जानकारी, परामर्श, मार्गदर्शन, प्रेरणा और रेफरल सेवाएं प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय टोल-फ्री नशा-मुक्ति हेल्पलाइन (14446) शुरू की है। यह हेल्पलाइन नज़दीकी नशा-मुक्ति और पुनर्वास सुविधा केंद्रों तक पहुंचने में भी मदद करती है। अब तक इस हेल्पलाइन पर 4.6 लाख से ज़्यादा कॉल प्राप्त हो चुके हैं।

लिखित उत्तर में यह भी बताया गया कि राज्य सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य संबंधित लोगों के सहयोग से स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में निरंतर जागरूकता और आउटरीच कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन पहलों में जागरूकता कार्यक्रम, शपथ अभियान, प्रतियोगिताएं, सेमिनार, कार्यशालाएं, रैलियां, नुक्कड़ नाटक और अन्य सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियां शामिल हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों और युवाओं को मादक पदार्थों के सेवन के नुकसान के बारे में जागरूक करना है।

समुदाय की भागीदारी और ज़मीनी स्तर पर जागरूकता को मज़बूत करने के लिए, मंत्रालय ने नशा मुक्त भारत अभियान के तहत नशा मुक्ति मित्रों (एनएमएम) का एक राष्‍ट्रव्यापी नेटवर्क बनाया है। 1.17 लाख से ज़्यादा स्वयंसेवकों ने एनएमएम के तौर पर पंजीकरण कराया है। एनएमबीए मोबाइल ऐप के ज़रिए, स्वयंसेवक ई-शपथ ले सकते हैं, आईईसी सामग्री और न्यूज़लेटर देख सकते हैं और ज़मीनी स्तर पर की गई जागरूकता गतिविधियों की जानकारी अपलोड कर सकते हैं, जिससे मादक पदार्थों के सेवन के ख़िलाफ़ राष्ट्रव्यापी अभियान में योगदान मिल सके।

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