प्रबंधन, निगरानी, संचार, मौसम की निगरानी, पायलटों की सक्षमता, बुनियादी ढांचे में वृद्धि और परिचालन निरीक्षण शामिल थे।
इस बेहतर सुरक्षा ढांचे के हिस्से के रूप में, भारतीय विमानन प्राधिकरण ने घाटी में व्यवस्थित हेलीकॉप्टर मूवमेंट के लिए समर्पित के-रूट्स (K-Routes) के प्रकाशन में तेजी लाई। एएआई (एएआई) ने हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) और संचार, नौवहन व निगरानी (सीएनएन) कर्मियों को रणनीतिक रूप से तैनात करके सहस्रधारा और सेरसी में हवाई यातायात नियंत्रण सेवाएं शुरू कीं। बद्रीनाथ और केदारनाथ में स्थायी एटीसी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भूमि की पहचान भी की गई है, जबकि हेलीकॉप्टर संचालन के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए अंतरिम परिचालन सुविधाएं स्थापित की गई हैं।
परिचालन निगरानी को मजबूत करने के लिए यूकाडा ने महत्वपूर्ण स्थानों पर 33 पीटीजेड (पैन-टिल्ट-ज़ूम) कैमरे लगाए। सहस्रधारा और सीतापुर में दो एकीकृत कमांड, नियंत्रण, संचार एवं समन्वय केंद्र (आईसीसीसीसी) स्थापित किए गए हैं, जहां से हेलीपैड संचालन, हेलीकॉप्टरों की निगरानी और मौसम पर केंद्रीय स्तर पर नजर रखी जा रही है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के साथ निकट समन्वय के माध्यम से मौसम की निगरानी क्षमताओं में भी काफी वृद्धि की गई है। मौसम की निगरानी को और मजबूत करने के लिए सीतापुर, केदारनाथ, बद्रीनाथ, झाला और खरसाली में पांच स्वचालित मौसम अवलोकन प्रणाली (एडब्ल्यूओएस) और सीलोमीटर स्थापित किए गए। हवाई यातायात नियंत्रण अधिकारियों ने सभी हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों को वर्तमान और पूर्वानुमानित मौसम की जानकारी निरंतर उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया।
चारधाम यात्रा के दौरान संचालित प्रत्येक हेलीकॉप्टर में हेलीकॉप्टर ट्रैकिंग डिवाइस लगाया गया, जिससे आईसीसीसीसी के माध्यम से उनकी लगातार निगरानी संभव हुई। संचार व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए तीन अतिरिक्त वीएचएफ (वेरी हाई फ्रीक्वेंसी) संचार सेट भी खरीदे गए।
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने महत्वपूर्ण हेलीपैडों पर विशेष उड़ान संचालन और एयरवर्थिनेस टीमों की तैनाती कर नियामकीय निगरानी को मजबूत किया। इन टीमों ने लगातार निगरानी, आकस्मिक निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट किए। पायलटों के फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) की भी प्रतिदिन निगरानी की गई ताकि थकान से जुड़े जोखिमों को समाप्त किया जा सके।
हिमालयी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए डीजीसीए ने पायलटों के लिए योग्यता मानकों को भी और कड़ा किया। चारधाम यात्रा के दौरान उड़ान भरने वाले प्रत्येक पायलट के लिए न्यूनतम 750 घंटे का पर्वतीय उड़ान अनुभव, जिसमें पिछले एक वर्ष में कम से कम 100 घंटे की उड़ान तथा केदारनाथ में कम से कम 10 टेकऑफ और लैंडिंग का अनुभव अनिवार्य किया गया।
सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई अतिरिक्त परिचालन उपाय भी लागू किए गए। हेलीकॉप्टरों में यात्रियों की संख्या अधिकतम अनुमत क्षमता के 70 प्रतिशत तक सीमित की गई। चार्टर उड़ानों की संख्या पर भी उचित सीमा तय की गई। हाई-टेंशन विद्युत लाइनों पर विमानन सुरक्षा संकेतक और चेतावनी गुब्बारे लगाए गए ताकि पायलटों को बेहतर दृश्यता मिल सके। साथ ही सभी हेलिपैडों पर समान ग्राउंड हैंडलिंग और भीड़ प्रबंधन व्यवस्था लागू की गई, जिससे यात्रियों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकी।
नागर विमानन मंत्री श्री राम मोहन नायडू ने आगे कहा, “विमानन में सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इससे कभी कोई समझौता नहीं हो सकता। हमने सुरक्षा उल्लंघनों के प्रति जीरो-टॉलरेंस (शून्य-सहनशीलता) का दृष्टिकोण अपनाया है। इसके अलावा, जब बात पवित्र चार धाम यात्रा पर जाने वाले लाखों भक्तों से जुड़ी हो, तब सुरक्षा पूरी तरह से अपरिहार्य हो जाती है।”
नागर विमानन मंत्रालय देशभर में हेलीकॉप्टर सुरक्षा को लगातार मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। देश के सबसे चुनौतीपूर्ण विमानन क्षेत्रों में से एक में चारधाम यात्रा 2026 के पहले चरण का सफल संचालन, सुरक्षा मानकों के प्रति मंत्रालय की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।


