
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुष्क भूमि कृषि में बदलाव लाने, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत करने और किसानों की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए विज्ञान, नीति एवं बाजार समर्थन पर आधारित एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। श्री चौहान ने राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी), नई दिल्ली में ‘ड्राईलैंड कांग्रेस 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि शुष्क भूमि को कमजोरी नहीं समझना चाहिए बल्कि सही वैज्ञानिक उपायों, नीतियों एवं बाजार के समर्थन से ये भारत और ऐसी ही चुनौतियों का सामना कर रहे अन्य क्षेत्रों के लिए ताकत का स्रोत बन सकते हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने जोर देकर कहा कि कृषि प्रणाली में बदलाव लाने के प्रयासों में खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और किसानों की समृद्धि को केंद्र में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सफलता का एकमात्र पैमाना सिर्फ़ उत्पादन बढ़ाना नहीं होना चाहिए बल्कि किसान समुदायों की बेहतर आजीविका एवं समृद्धि भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “शुष्क भूमि कोई कमजोरी नहीं हैं। सही विज्ञान, सही नीति एवं सही बाजार सहयोग से, ये भारत, अफ्रीका और ऐसी ही चुनौतियों का सामना कर रहे अन्य क्षेत्रों के लिए सबसे बड़ी ताकतों में से एक बन सकते हैं।”
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के पूर्व सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्व महानिदेशक डॉ. आर. एस. परोदा ने की। आईसीएआर और आईसीआरआईएसएटी के पूर्व दिग्गजों, जिनमें डॉ. पंजाब सिंह, डॉ. त्रिलोचन महापात्र और डॉ. विलियम डी. डार शामिल हैं, ने आईसीआरआईएसएटी की बोर्ड अध्यक्ष, सुश्री कैथी रीड, और सीजीआईएआर की मुख्य वैज्ञानिक, डॉ. सैंड्रा मिलाच के साथ इस सत्र में हिस्सा लिया। डॉ. एम. एल. जाट, सचिव, डीएआरई और महानिदेशक, आईसीएआर तथा डॉ. हिमांशु पाठक, महानिदेशक, आईसीआरआईएसएटी, कांग्रेस के संरक्षक हैं। कांग्रेस के सह-अध्यक्ष डॉ. स्टैनफोर्ड ब्लेड, उप महानिदेशक (अनुसंधान एवं नवाचार), आईसीआरआईएसएटी; डॉ. देवेंद्र कुमार यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), आईसीएआर; और श्री संजय अग्रवाल, अतिरिक्त महानिदेशक, आईसीआरआईएसएटी हैं।
पद्म श्री पुरस्कार विजेता और किसान भिकल्या लाडक्या धिंडा ने शुष्क इलाकों में कृषि में बदलाव लाने की रणनीतियों में किसानों के अनुभवों एवं ज़रूरतों को शामिल करने के महत्व पर बल देते हुए किसानों का पक्ष रखा।
‘ड्राईलैंड कांग्रेस 2026’ का आयोजन 10 सितंबर 2026 से नई दिल्ली में हो रहा है जिसमें 25 से ज़्यादा देशों के 800 से अधिक प्रतिनिधि एक साथ आए हैं, जिसमें वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, विकास सहयोगी, उद्योग प्रतिनिधि, शिक्षाविद, नागरिक समाज संगठन और किसान शामिल हैं ताकि मज़बूत एवं सतत शुष्क भूमि कृषि के लिए विज्ञान, तकनीक एवं नीति पर आधारित समाधानों पर चर्चा कर सकें। तीन दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य शुष्क भूमि पर खेती करने वाले समुदायों के लिए आजीविका का बेहतर अवसर उत्पन्न करने के साथ-साथ, फसलों की सहन-क्षमता को मज़बूत करना, शुष्क भूमि वाले इलाकों का सतत प्रबंधन, पोषण, बाज़ार और नीतियों पर ध्यान केंद्रित करना है।


