छत्तीसगढ़राज्य

मानसून में राजनांदगांव बारिश का पानी जमा करने के लिए तैयार

मानसून आते ही देशव्यापी #CatchTheRain (बारिश का पानी जमा करें) अभियान तेज़ी पकड़ रहा है। देश भर के ज़िले पानी की सुरक्षा को मज़बूत करने और जल स्रोतों को टिकाऊ बनाने के लिए मौसमी बारिश का फ़ायदा उठा रहे हैं। इनमें छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव ज़िला सबसे आगे रहा है, जिसने दिखाया है कि तैयारी ही पानी के असरदार संरक्षण की नींव है। अपने अनोखे ‘मिशन जल रक्षा’ के ज़रिए, ज़िले ने वैज्ञानिक बुनियादी ढांचा तैयार किया है, समुदायों को एकजुट किया है और भूजल को फिर से भरने के नए तरीके अपनाए हैं ताकि बारिश की हर बूंद को एकत्र किया जा सके, बचाया जा सके और वापस ज़मीन के नीचे जलभंडारों तक पहुँचाया जा सके। आसान शब्दों में कहें तो, राजनांदगांव मानसून के लिए तैयार है—और बारिश का पानी बचाने के लिए भी तैयार है।

बारिश की पहली बूंद के ज़मीन पर गिरने से बहुत पहले ही, राजनांदगांव ने बारिश की हर बूंद को इकट्ठा करने, बचाने और ज़मीन के नीचे पहुँचाने के लिए अपनी पूरी तैयारी कर ली थी। ‘मिशन जल रक्षा’ के ज़रिए, ज़िले ने एक ऐसा वैज्ञानिक और समुदाय-आधारित ढांचा बनाया है जो यह सुनिश्चित करता है कि बारिश का पानी बहकर बर्बाद न हो, बल्कि उसे वापस ज़मीन के अंदर पहुँचाया जाए ताकि कीमती भूजल भंडार को फिर से भरा जा सके।

इस पहल में जीआईएस मैपिंग, रिमोट सेंसिंग, एक्विफर मैपिंग, डिजिटल एलिवेशन मॉडल (डीईएम) और रिज-टू-वैली प्लानिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है ताकि भूजल को फिर से भरने के लिए सबसे सही जगहों की पहचान की जा सके। इस वैज्ञानिक तरीके के साथ-साथ ज़मीन पर नए-नए उपाय भी किए गए हैं, जैसे बेकार पड़े बोरवेल को रिचार्ज शाफ्ट में बदलना और गहरे इंजेक्शन कुओं के साथ छोटे परकोलेशन टैंक बनाना, जिससे बारिश का पानी कठोर चट्टानों वाले इलाकों में भी गहरे जलभंडारों तक पहुँच सके।

‘मिशन जल रक्षा’ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह जन-आंदोलन बन गया है। किसानों, महिलाओं, युवाओं, ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों ने पानी की बजटिंग, जागरूकता अभियानों और व्यवहार में बदलाव लाने वाले प्रयासों को उत्साह के साथ अपनाया है। इससे ‘जन भागीदारी’ टिकाऊ जल प्रबंधन की मुख्य ताकत बन गई है। फसल विविधीकरण ने इन प्रयासों को और मज़बूत किया है; गर्मी के मौसम में धान की खेती का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा कम पानी वाली फसलों की ओर स्थानांतरित हो गया है, जिससे भूजल पर दबाव कम हुआ है और खेती को टिकाऊ बनाने में मदद मिली है।

जिले की तैयारी साफ़ तौर पर दिखाई देने वाले परिणाओं से पता चलती है। 662 गांवों में पानी बचाने और रिचार्ज करने के लिए 60,000 से ज़्यादा ढांचे बनाए गए हैं, 500 से ज़्यादा बेकार पड़े बोरवेल को रिचार्ज शाफ़्ट में बदला गया है, 1,700 से ज़्यादा छोटे परकोलेशन टैंक के साथ 600 से ज़्यादा इंजेक्शन वेल बनाए गए हैं, और 2,500 से ज़्यादा जल स्रोतों को जियो-टैग किया गया है। इन कार्यों से 51 लाख से ज़्यादा ‘पर्सन-डेज़’ (काम के दिन) का रोज़गार उपलब्ध हुआ है और ज़मीन के नीचे पानी का स्तर औसतन लगभग 2.04 मीटर बढ़ा है, जिससे पूरे जिले में सिंचाई और पीने के पानी की सुरक्षा मज़बूत हुई है।

जैसे-जैसे #CatchTheRain अभियान देश भर के नागरिकों को “पानी की हर बूंद बचाने” के लिए प्रेरित कर रहा है, राजनांदगांव उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे पहले से योजना बनाकर, वैज्ञानिक तरीकों से और जन-भागीदारी के ज़रिए मॉनसून को पानी की सुरक्षा के स्थायी स्रोत में बदला जा सकता है। हर रिचार्ज ढांचा, हर दोबारा चालू किया गया बोरवेल और पानी की हर बचाई गई बूंद समुदाय और जिले के उस साझा संकल्प को दिखाती है, जिसका उद्देश्य आज की बारिश को कल की भूजल सुरक्षा में बदलना है।

‘मिशन जल रक्षा’ इस बात को और मज़बूत करता है कि बारिश का पानी जमा करना सिर्फ़ मौसमी गतिविधि नहीं है, बल्कि यह जल स्रोतों को बनाए रखने, जलवायु परिवर्तन का सामना करने और पानी के लिहाज़ से सुरक्षित भविष्य की दिशा में लगातार चलने वाला संकल्प है।

राजनांदगांव बारिश का इंतज़ार नहीं कर रहा है—यह पानी की हर बूंद को सहेजने के लिए तैयार है।

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