छत्तीसगढ़राज्य

नक्सलवाद से मिले घावों पर मरहम लगाकर हर पीड़ित को सम्मानपूर्ण जीवन देना हमारा संकल्प : शाह

नक्सलमुक्त बस्तर को अब तेज गति से विकास और समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : साय

रायपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब उससे मिले घावों पर मरहम लगाना, पीड़ितों का पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। नक्सलवाद ने पाँच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। अब हमें नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हँसता-खेलता, खुशहाल और समृद्ध बनाना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्रत्येक दिव्यांगजन और नक्सली हिंसा से प्रभावित व्यक्ति के पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस संकल्प को पूरा करने में भारत सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में सेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत दंतेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित तीन दिवसीय शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं विभिन्न सहायक उपकरणों से लाभान्वित किया जाएगा। इनमें दंतेवाड़ा जिले के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 दिव्यांगजन शामिल हैं। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर तथा सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है।

नक्सलवाद समाप्त हुआ, अब उसकी पीड़ा और निशानियों को भी मिटाना है : अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा से प्रभावित दिव्यांग आदिवासी भाई-बहनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण प्रदान कर उनके जीवन को सुगम बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि 5 से 7 अक्टूबर 2026 के दौरान जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें अकेले बस्तर के 1,570 से अधिक लाभार्थी थे। यह संख्या बस्तर की उस पीड़ा का परिचय देती है, जिसे यहाँ के गरीब और आदिवासी परिवारों ने दशकों तक सहन किया है।

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि नक्सलियों ने आईईडी विस्फोटों के माध्यम से निर्दोष नागरिकों को दिव्यांग बनाया। इससे बड़ा मानवाधिकारों का हनन कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद समाप्त करने का दृढ़ संकल्प लिया था और आज नक्सलवाद समाप्त हो चुका है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि केवल नक्सलवाद समाप्त कर देने से पाँच दशकों की पीड़ा समाप्त नहीं होगी। हमें इन घावों पर मरहम लगाना होगा। नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करना होगा और उनके सम्मानपूर्वक जीवनयापन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

उन्होंने कहा कि दिव्यांग भाई-बहनों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, स्मार्ट वॉकिंग स्टिक और कृत्रिम अंग जैसे उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन में नई खुशियाँ लाई जा सकती हैं। इस सेवा कार्य में छत्तीसगढ़ सरकार, जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग, भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और भारतीय जैन संघ सहित अनेक संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व के सहयोग की भी सराहना करते हुए कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष और बस्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रयासों में स्थानीय जनजातीय समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम और नियद नेल्लानार से बदल रही बस्तर की तस्वीर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर में शांति और विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम, नियद नेल्ला नार और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना जैसी पहलों के माध्यम से बस्तर को फिर से हँसता-खेलता बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि जिस बस्तर में कभी गोलियों और बम धमाकों की आवाजें सुनाई देती थीं तथा भय का वातावरण रहता था, वहाँ आज हजारों युवा खेलों में भाग ले रहे हैं और अपनी परंपराओं को जीवित रख रहे हैं। बस्तर ओलंपिक ने युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया है। वहीं बस्तर पंडुम के माध्यम से जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को पुनर्जीवित करने का बड़ा प्रयास हुआ है।
शाह ने कहा कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाई जा रही हैं। पाँच दशकों तक जिन क्षेत्रों तक आवश्यक सुविधाएँ नहीं पहुँच सकीं, वहाँ अब आधारभूत अधोसंरचना और जनकल्याणकारी योजनाओं का विस्तार हो रहा है।

आत्मसमर्पण करने वाले 8,526 नक्सलियों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और विकास की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

उन्होंने बताया कि जिन लोगों के बैंक खाते नहीं थे, ऐसे 7,328 लोगों के बैंक खाते खोले गए हैं। 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। इसी प्रकार 455 लोगों को नौकरी दी गई है और 129 लोगों को भूमि का आवंटन किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे रोजगार और स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।

केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए हैं और 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई गई है। क्षेत्र में आवागमन और संपर्क सुविधाओं के विस्तार के लिए 372 नई सड़क परियोजनाएँ प्रारंभ की गई हैं तथा 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि 48,526 लोगों के आधार कार्ड बनाए गए हैं और इलवाद पंचायत पुरस्कार के अंतर्गत 44 पंचायतों को पुरस्कृत किया गया है।

श्री शाह ने कहा कि ये प्रयास नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने तथा उनके जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान 500 से अधिक सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए थे। इनमें से 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को अब ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिन शिविरों में कभी सुरक्षा बलों के जवान बैठकर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे, उन्हीं स्थानों पर अब भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारी बैठकर विकसित बस्तर की नींव रखेंगे। शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि इन सार्वजनिक सेवा केंद्रों के माध्यम से बस्तर में विकास और जनकल्याण के कार्यों को नई गति मिलेगी तथा विकसित बस्तर के निर्माण का संकल्प साकार होगा।

नक्सलमुक्त बस्तर को देश का सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्र बनाना हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद की दशकों पुरानी चुनौती से मुक्ति मिली है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि हमारे वीर सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, पराक्रम और बलिदान तथा बस्तर की जनता के सहयोग से संभव हुई है।

मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों तथा नक्सली हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था, जब यह विश्वास करना कठिन लगता था कि छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो पाएगा। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से आज हमने यह लक्ष्य प्राप्त किया है।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता और विशेष रूप से बस्तरवासियों की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध इस निर्णायक लड़ाई में बस्तर की जनता ने सुरक्षा बलों का भरपूर सहयोग किया। यहाँ के लोग भय और हिंसा से मुक्ति चाहते थे। वे शांति, सुरक्षा और विकास की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते थे। जनता के इसी विश्वास और सहयोग ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की दौड़ में पीछे रह गया। अब समय आ गया है कि इस क्षेत्र को तेज गति से विकास के पथ पर आगे बढ़ाया जाए। हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में अग्रणी बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का भरोसा दिलाया है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से इस लक्ष्य को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है।

जहाँ कभी भय और हिंसा थी, वहाँ अब पहुँच रही शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की सुविधाएँ

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से बस्तर के उन दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुँचा रही है, जो दशकों तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे।

उन्होंने बताया कि आज 500 से अधिक गाँवों में सड़क और बिजली की सुविधाएँ पहुँची हैं। घरों तक नल से जल पहुँचाने और दूरसंचार सुविधाओं के विस्तार का कार्य तेजी से किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए अस्पतालों की व्यवस्था की जा रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से दूरस्थ अंचलों के बच्चों, महिलाओं और परिवारों को बेहतर अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पहले अनेक गाँवों के लोगों के राशन कार्ड तक नहीं बन पाते थे। राशन प्राप्त करने के लिए उन्हें कई दिनों तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब गाँवों में ही राशन दुकानों की व्यवस्था कर लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास है कि बस्तर के अंतिम गाँव और अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुँचे। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल और संचार सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

सुरक्षा शिविरों से सेवा केंद्रों तक, बस्तर में परिवर्तन का नया अध्याय

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित सुरक्षा शिविरों ने शांति और सुरक्षा का वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब इन शिविरों को सेवा और विकास के केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि खाली हो रहे सुरक्षा शिविरों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में परिवर्तित करना राज्य सरकार का महत्वपूर्ण संकल्प है। इन केंद्रों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण और आजीविका संबंधी गतिविधियाँ संचालित की जाएँगी, ताकि युवाओं और ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री ने बताया कि महान जननायक शहीद वीर गुंडाधुर के गाँव नेतानार में पहला सेवा डेरा प्रारंभ किया गया है। यहाँ स्थानीय लोगों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही बस्तर के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी आजीविका गतिविधियाँ भी प्रारंभ की गई हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अन्य सेवा डेरों में भी स्थानीय संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा आजीविका गतिविधियाँ संचालित की जाएँगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बस्तर में हो रहे परिवर्तन की नई तस्वीर है। जिन स्थानों पर कभी सुरक्षा बलों की तैनाती आवश्यक थी, अब वहीं से जनसेवा, कौशल विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर सृजित होंगे।

खेती, पशुपालन और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से बढ़ेगी बस्तर के परिवारों की आय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के साथ-साथ कृषि, पशुपालन और स्थानीय आजीविका को भी विशेष प्राथमिकता दे रही है।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए परिवारों को दो-दो गायें उपलब्ध कराई जा रही हैं। डेयरी विकास के लिए भी समझौता किया गया है, ताकि ग्रामीण परिवारों की आय बढ़े और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए इंद्रावती नदी पर देउरगाँव और मटनार में बड़ी सिंचाई परियोजनाओं हेतु लगभग दो हजार करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से लगभग 80 हजार एकड़ कृषि भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी।

उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों की खेती अधिक लाभकारी बनेगी, कृषि उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपने संसाधनों और केंद्र सरकार के सहयोग से बस्तर के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

दिव्यांग भाई-बहनों के जीवन में आत्मविश्वास लौटाना हमारी जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सली हिंसा के कारण बस्तर के अनेक निर्दोष ग्रामीणों ने अपने हाथ-पैर खोए हैं। आईईडी विस्फोटों ने अनेक परिवारों को जीवनभर की पीड़ा दी है। ऐसे प्रभावित भाई-बहनों के जीवन को सुगम बनाना, उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ाना और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना हमारी सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से राज्य सरकार और भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर सहित सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग, कैलिपर्स, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दंतेवाड़ा में आयोजित शिविर के माध्यम से दंतेवाड़ा जिले के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 दिव्यांगजनों सहित कुल 768 लोगों को लाभान्वित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा में अपने अंग खो चुके भाई-बहनों को कृत्रिम अंग मिलने से उनके जीवन में नई आशा और आत्मविश्वास का संचार होगा। जो लोग वर्षों से चलने-फिरने या दैनिक कार्य करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे, उनके लिए ये उपकरण बड़ी सहायता सिद्ध होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास केवल सहायक उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति को आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर प्रदान करना है।

उन्होंने इस पुनीत कार्य में सहयोग देने वाली भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और अन्य संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएँ देते हुए माँ दंतेश्वरी से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों की पीड़ा को दूर करने का अभियान निरंतर जारी रहेगा : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कार्यक्रम में नक्सली हिंसा से प्रभावित परिवारों की पीड़ा का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों ने अनेक निर्दोष ग्रामीणों का जीवन प्रभावित किया है।

उन्होंने कहा कि कोई बच्चा अपने गाँव में खेलते हुए, कोई किसान अपने खेत की मेड़ पर चलते हुए और कोई ग्रामीण दैनिक कार्यों के दौरान आईईडी विस्फोट का शिकार हुआ। किसी ने अपना हाथ खोया, किसी ने पैर और किसी की आँखों की रोशनी चली गई। नक्सली हिंसा ने बस्तर के निर्दोष लोगों को ऐसी पीड़ा दी, जिसकी कल्पना करना भी कठिन है।

श्री शर्मा ने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद बस्तर की जनता ने नक्सलवाद से मुक्ति का संकल्प नहीं छोड़ा। जनता के इसी विश्वास और सुरक्षा बलों के साहस के कारण आज बस्तर नक्सलवाद से मुक्त हुआ है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और सहायता का यह अभियान निरंतर जारी रहना चाहिए।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार और बस्तर के जनप्रतिनिधि प्रत्येक जरूरतमंद और प्रभावित व्यक्ति तक सहायता पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा प्रयास रहेगा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित कोई भी व्यक्ति पुनर्वास और आवश्यक सहायता से वंचित न रहे।

कृत्रिम अंग मिलने से दिव्यांगजनों के जीवन में लौटी नई उम्मीद
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिव्यांगजनों से संवाद किया और उनके अनुभव जाने। सुकमा जिले के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायाँ पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके कारण पैर काटना पड़ा। अब कृत्रिम पैर मिलने से वे दोबारा चलने लगे हैं और देशसेवा के लिए फिर से तैयार हैं।

बीजापुर जिले के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने स्थानीय गोंडी बोली में अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में चिंतावागु नदी में मछली पकड़ने जाते समय नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट में उन्होंने अपना दायाँ पैर खो दिया था। शिविर में कृत्रिम पैर मिलने के बाद वे फिर से चल पा रहे हैं। यह उनके जीवन का अत्यंत भावुक और यादगार क्षण है।

इसी प्रकार दंतेवाड़ा जिले के जावंगा एवं मेटापाल के जन्मजात अस्थिबाधित दिव्यांगजन अजय सोरी और कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें दैनिक आवागमन में बड़ी सुविधा होगी।

लाभार्थियों ने इस संवेदनशील पहल के लिए केंद्र और राज्य सरकार तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

विकसित बस्तर के संकल्प को साकार करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध
कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि नक्सलवाद से मुक्त बस्तर अब विकास और खुशहाली की नई दिशा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से प्रभावित लोगों के पुनर्वास, दिव्यांगजनों की सहायता और दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने के प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर के समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति और सुरक्षा की स्थापना के बाद अब शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, पर्यटन, संस्कृति और अधोसंरचना के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा संकल्प है कि नक्सलवाद से मुक्त बस्तर का प्रत्येक गाँव विकास की मुख्यधारा से जुड़े, हर युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले और प्रत्येक परिवार के जीवन में खुशहाली आए। जिस बस्तर ने दशकों तक हिंसा और भय की पीड़ा सही है, वही बस्तर अब शांति, समृद्धि और विकास की नई पहचान बनेगा।

 

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