
‘ऑपरेशन वज्र’ के तहत, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की मध्य प्रदेश यूनिट ने बिहार के गया और मसौढ़ी (पटना) में नकली दवाओं/ अवैध दवाओं के 8 गोदामों और एक अवैध विनिर्माण इकाई को जब्त किया है। इन जगहों का इस्तेमाल नशीले पदार्थों और अन्य दवाओं को अवैध रूप से बनाने और भंडारण करने के लिए किया जा रहा था।
यह 2025 में दर्ज अपराध की जांच में एक और बड़ी कामयाबी है। एक बड़े अनुवर्ती (फॉलो-अप) अभियान के दौरान बिहार के गया में चार अवैध गोदामों का भंडाफोड़ किया गया, जिसमें 68,200 ट्रामाडोल टैबलेट, 59,000 अन्य टैबलेट और कोडीन सिरप की 52,542 बोतलें जब्त की गईं।


लगातार जांच और तकनीकी व मानवीय खुफिया जानकारी जुटाने के आधार पर, सीबीएन ने 22 जुलाई 2026 को मुख्य आरोपी को सफलतापूर्वक गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी से महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिससे आगे बड़े पैमाने पर कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ।
16 से 27 जुलाई 2026 के बीच, सीबीएन की एमपी इकाई (नीमच) के निवारक अनुभाग (प्रिवेंटिव सेक्शन) ने पूरे बिहार में कड़ी निगरानी और क्षेत्रीय अभियान चलाए। जांच के दौरान पता चला कि फरार आरोपी ने गया के खानजहांपुर इलाके में गैर-कानूनी तरीके से बनाए गए नशीले पदार्थों और नकली दवाओं को जमा करने के लिए फिर से अवैध गोदाम चलाना शुरू कर दिया था। कई दिनों तक उसकी गतिविधियों पर गुप्त रूप से नजर रखने के बाद, सीबीएन की टीम ने उसे सफलतापूर्वक पकड़ लिया।

आरोपी द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर, सीबीएऩ की टीम ने दो अपंजीकृत और बिना मंजूरी वाले गोदामों की तलाशी ली और गैर-कानूनी तरीके से बनाए गए 21,373 ब्यूप्रेनोर्फिन इंजेक्शन एम्प्यूल बरामद किए। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में नकली और मिलावटी गैर-एनडीपीएस दवाएं भी ज़ब्त की गईं, जिनमें क्लैवम-625, पैन-40, बेटाडीन ऑइंटमेंट, एजिथ्रल और कई अन्य दवाएं शामिल थीं।

स्थानीय पुलिस की सहायता से किए गए बाद के अनुवर्ती अभियानों से शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थित छह और अपंजीकृत और अनधिकृत गोदामों की पहचान की गई। इन परिसरों से पर्याप्त मात्रा में नकली और अनाधिकृत रूप से भंडार की गई गैर-एनडीपीएस दवाएं मिलीं। जब्त किए गए भंडार और सील किए गए गोदामों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए बिहार राज्य औषधि प्रशासन को सौंप दिया गया।
सीबीएन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर, राज्य औषधि विभाग ने अवैध गोदामों से निम्नलिखित मात्रा में गैर-एनडीपीएस नकली दवाएं जब्त कीं:
- टैबलेट/कैप्सूल – 439,774
- इंजेक्शन/वायल/एम्प्यूल – 1,895
- सिरप/बोतलें – 3,811
- अन्य दवा उत्पाद (लोशन/ट्यूब/ड्रॉप्स, आदि) – 3,490
लगातार पूछताछ के दौरान, संदिग्धों ने आगे बताया कि उनके पहले गिरफ्तार किए गए एक साथी ने पटना के मसौढ़ी के पास एक फार्महाउस में गैर-कानूनी विनिर्माण इकाई बनाई थी, जहां बुप्रेनोरफिन और अन्य नशीले पदार्थों को गैर-कानूनी तरीके से बनाने के लिए मशीनरी और उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस जानकारी पर तुरंत कार्रवाई करते हुए, सीबीए की टीम ने स्थानीय पुलिस, राज्य औषधि विभाग और खाद्य विभाग के अधिकारियों की मदद से उस जगह पर संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान विनिर्माण से जुड़ी कई मशीनें, उपकरण, रसायन और आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग एजेंट बरामद किए गए। पूरी गैर-कानूनी विनिर्माण इकाई को बंद कर दिया गया और एनडीपीएस अधिनिय, 1985 के प्रावधानों के तहत सभी मशीनरी, उपकरणों और संबंधित सामान को ज़ब्त कर लिया गया।
जांच से इस सिंडिकेट के काम करने के तरीके का भी पता चला है। आरोपियों ने कम आय वाले इलाकों में बिना किसी किराए के समझौते (टेनेंसी एग्रीमेंट) के जगह किराए पर ली, किसी भी तरह का डिजिटल रिकॉर्ड न बने, इसलिए किराए का भुगतान नकद में किया, और कानून लागू करने वाली एजेंसियों से बचने के लिए नकली पहचान दस्तावेजों के जरिए लिए गए मोबाइल कनेक्शन का इस्तेमाल किया।
इस कैलेंडर वर्ष में, सीबीएन एमपी इकाई ने अब तक 90 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें 3 अवैध लैब का भंडाफोड़ शामिल है और 121 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) संगठित ड्रग तस्करी सिंडिकेट को खत्म करने और नशीले पदार्थों व साइकोट्रोपिक पदार्थों के अवैध विनिर्माण, भंडारण और तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कानून को सख्ती से लागू करने तथा भारत में दवाओं के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करने के अपने पक्के संकल्प को दोहराता है।


