
है, 105 कंपनियों को उन्नत चिप डिजाइन टूल्स के साथ सहायता दी गई है और उन्नत नोड्स सहित विभिन्न फाउंड्री में 23 डिजाइन टेपआउट पूरे किए गए हैं, जो सेमीकंडक्टर डिजाइन में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाते हैं।
सेमीकॉन इंडिया 2025 में भारत के एक वैश्विक सेमीकंडक्टर गंतव्य (डेस्टिनेशन) के रूप में उभरने को मजबूत अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिली, जिसमें 48 देशों और क्षेत्रों की 350 से अधिक कंपनियों ने भाग लिया था। 13 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर और प्रमुख वैश्विक सेमीकंडक्टर सीईओ की भागीदारी ने भारत के नीतिगत ढांचे और सेमीकंडक्टर से संबंधित दीर्घकालिक दृष्टिकोण में बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय भरोसे को उजागर किया।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण: वैश्विक स्तर पर पहचान
एआई और सेमीकंडक्टर में निवेश के अनुरूप भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का परिदृश्य बदल रहा है। यह क्षेत्र 13 लाख करोड़ रुपए का उद्योग बन गया है और इलेक्ट्रॉनिक्स भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात सेक्टर बनकर उभरा है, जो ऐसी उपलब्धि है जिसकी कल्पना भी एक दशक पहले नहीं की जा सकती थी। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फ़ोन बनाने वाला देश है। वर्तमान में एआई-सक्षम डेटा सेंटर कंपोनेंट्स, 5जी उपकरणों और उच्च-स्तरीय नेटवर्किंग गियर तक फैला जो उन्नत विनिर्माण परितंत्र बन रहा है, वह भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ रहा है और इसके साथ ही देश में बड़े पैमाने पर रोज़गार भी सृजित कर रहा है।
यूपीआई का एक दशक पूरा हुआ : वैश्विक भुगतान भारत का नेतृत्व
अप्रैल 2026 में, भारत के वित्तीय परिदृश्य को बदलने वाले यूपीआई के दस वर्ष पूरे हो गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में, इस प्लेटफॉर्म पर 24,162 करोड़ लेनदेन दर्ज किए। यूपीआई अब भारत के 81% डिजिटल भुगतान को संचालित करता है और वैश्विक स्तर पर सभी वास्तविक समय डिजिटल लेनदेन लगभग 49% है, जिससे वास्तविक समय भुगतान के क्षेत्र में भारत के वैश्विक नेतृत्व के रूप में स्थिति सुदृढ़ हुई है। यूपीआई कई देशों में काम कर रहा है और सहयोग समझौतों के ज़रिए 23 देशों ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को औपचारिक रूप से अपनाया है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
पिछले एक वर्ष में भारत का डिजिटल आधार और मज़बूत हुआ है। मार्च 2026 तक ब्रॉडबैंड ग्राहकों (सब्सक्राइबर्स) की संख्या 106.58 करोड़ तक पहुंच गई है। भारतनेट ने 2.18 लाख ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड से जोड़ा है, जिससे ग्रामीण भारत के आखिरी कोने तक डिजिटल पहुंच संभव हो पाई है। भारत का 5जी नेटवर्क अब 99.9% ज़िलों तक पहुंच चुका है और इसके लिए 4.74 लाख टावर लगाए गए हैं। फरवरी 2026 में पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए गुवाहाटी में राष्ट्रीय डेटा केंद्र शुरू किया गया, जिससे इस क्षेत्र में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा संप्रभुता को मज़बूती मिली है।


