
गुजरात की आर्थिक राजधानी सूरत देश का पहला ऐसा महानगर बनने की दिशा में अग्रसर है, जिसकी आबादी 70 लाख से अधिक होने के बावजूद वह स्लम-फ्री (झुग्गी-मुक्त) शहर बनेगा। यह जानकारी गांधीनगर में भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद प्रवक्ता मंत्री जीतुभाई वाघाणी ने मीडिया को दी है। गुजरात सरकार के प्रवक्ता मंत्री जीतु वाघाणी ने बताया कि नरेन्द्र मोदी ने अपने गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान शहरी क्षेत्रों को स्लम-फ्री बनाने की जो दूरदर्शी और महत्वाकांक्षी पहल की थी, उसके आज सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
20 वर्ष में बड़ा बदलाव
वर्ष 2006 में सूरत की लगभग 38 प्रतिशत आबादी झुग्गी-बस्तियों में रहती थी। झुग्गीवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और उन्हें पक्के आवास उपलब्ध कराने के लिए पिछले दो दशकों में निरंतर योजनाबद्ध प्रयास किए गए। इन प्रयासों का परिणाम यह रहा कि आज सूरत में झुग्गी-बस्तियों में रहने वाली आबादी घटकर मात्र 5 प्रतिशत रह गई है। इससे सूरत में स्लम क्षेत्र लगभग समाप्ति की कगार पर पहुंच गए हैं।


