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दिल्लीराज्य

किसानों की सुरक्षा के लिए नकली उर्वरकों और धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त कार्रवाई

दिल्ली। भारत सरकार ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और देश में नकली उर्वरकों के निर्माण और बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।

लोकसभा में लिखित उत्तर देते हुए रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने बताया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत प्रशासित उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) नियंत्रण आदेश, 1985, निर्धारित मानकों को पूरा न करने वाले उर्वरकों के निर्माण या बिक्री पर सख्त प्रतिबंध लगाता है। राज्य सरकारें इस अधिनियम के उल्लंघन के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए अधिकृत हैं, जिनमें लाइसेंस रद्द करना या निलंबित करना तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई करना शामिल है। इसके अंतर्गत तीन महीने से लेकर सात वर्ष तक की कारावास की सजा का प्रावधान है।

भारत सरकार राज्यों द्वारा कालाबाजारी, जमाखोरी, घटिया उर्वरकों और हेराफेरी के मामलों में की गई प्रवर्तन कार्रवाई की साप्ताहिक आधार पर निगरानी करती है। अप्रैल 2025 से अब तक देश भर में कुल 4,30,541 छापे मारे गए हैं। इसके परिणामस्वरूप 15,544 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, 6,620 लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए हैं और दोषियों के खिलाफ 794 एफआईआर दर्ज की गई हैं।

इसके अलावा राज्य सरकारों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिकांश राज्यों ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में नकली रासायनिक उर्वरकों के निर्माण में कोई भी कारखाना या कंपनी शामिल नहीं पाई गई है। हालांकि कुछ राज्यों ने व्यक्तियों एवं विक्रेताओं के खिलाफ ऐसे मामले दर्ज किए हैं और उनके द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी दी है। छत्तीसगढ़ राज्य में दो एफआईआर दर्ज की गईं। हरियाणा में चार एफआईआर, कर्नाटक में 15 एफआईआर, मध्य प्रदेश में नकली उर्वरकों के 16 मामले दर्ज किए गए और 14 एफआईआर दर्ज की गईं हैं । महाराष्ट्र में नकली उर्वरकों में शामिल 19 निर्माताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए गए। ओडिशा में तीन मामले दर्ज किए गए। राजस्थान ने संदिग्ध उर्वरकों के 42 निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई और उत्तर प्रदेश में पिछले पांच वर्षों में 36 मामले दर्ज किए गए।

इसके अलावा भारत सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत उर्वरकों को आवश्यक वस्तु घोषित किया है और राज्य सरकारों को किसी भी प्रकार की टैगिंग या जबरन बिक्री को रोकने के लिए पर्याप्त अधिकार दिए हैं। हालांकि उर्वरक विभाग ने उर्वरक कंपनियों और राज्य सरकारों को नियमित रूप से निर्देश जारी किए हैं कि वे सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग को हतोत्साहित करें।

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