Google Analytics
छत्तीसगढ़राज्य

नमो ड्रोन दीदी’ योजना से ग्रामीण महिलाओं को मिलेगी नई उड़ान

दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के सम्बन्ध में श्री ससिकांत सेंथिल के प्रश्नों के उत्तर में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने ‘नमो ड्रोन दीदी’ को केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में मंजूरी दी है, जिसकी परियोजना अवधि 2023-24 से 2025-26 तक है और इसका बजट 1261 करोड़ रुपये है, ताकि चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ड्रोन प्रदान किए जा सकें जो किसानों को कृषि उद्देश्यों (उर्वरक और कीटनाशक के उपयोग) के लिए किराये की सेवाएँ प्रदान करें। ड्रोन और सहायक प्रभारों की लागत का 80% तक अधिकतम 8.0 लाख रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन खरीदने के लिए प्रदान किया जाता है। एसएचजी के क्लस्टर स्तरीय संघ (सीएलएफ) 3% की ब्याज छूट के साथ राष्ट्रीय कृषि अवसंरचना वित्तपोषण सुविधा (एआईएफ) के तहत ऋण के रूप में शेष राशि (खरीद की कुल लागत में से सब्सिडी को छोड़कर) जुटा सकते हैं।

उन्होंने जानकरी दी कि नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत, ड्रोन एक पैकेज के रूप में प्रदान किए जाते हैं, जिसमें तरल उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए स्प्रे असेंबली वाला बुनियादी ड्रोन शामिल है। पैकेज में अतिरिक्त 4 स्पेयर बैटरी सेट, एक स्पेयर प्रोपेलर सेट, नोजल सेट, डुअल चैनल फास्ट बैटरी चार्जर, बैटरी चार्जर हब, ड्रोन पायलट के लिए 15 दिन का प्रशिक्षण, ड्रोन सहायक प्रशिक्षण, एक साल का व्यापक बीमा, 2 साल का वार्षिक रखरखाव अनुबंध और लागू जीएसटी शामिल हैं। 15 दिन का ड्रोन पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम में ड्रोन पायलट लाइसेंस सुरक्षित करने के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण, उड़ान की तैयारी, छोटे मरम्मत और रखरखाव, और कीटनाशक और तरल उर्वरक के छिड़काव के लिए ड्रोन हैंडलिंग का व्यावहारिक अभ्यास शामिल है।उर्वरक विभाग द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, मुख्य उर्वरक कंपनियों (एलएफसी) ने 2023-24 में एसएचजी की ड्रोन दीदियों को नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत 500 ड्रोन वितरित किए हैं। इन सभी ड्रोन दीदियों को डीजीसीए द्वारा अधिकृत रिमोट पायलट संगठनों (आरपीटीओ) में प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। राज्यवार विवरण अनुबंध में दिया गया है।

कृषि विकास और ग्रामीण परिवर्तन केंद्र (एडीआरटीसी), बैंगलोर ने नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत एलएफसी द्वारा प्रदान किए गए इन 500 ड्रोन पर ड्रोन संचालन की आर्थिक और व्यवसायिक व्यवहार्यता पर एक अध्ययन किया है। अध्ययन से संकेत मिलता है कि एसएचजी पहले मुख्य रूप से कृषि और संबद्ध गतिविधियों में नियोजित थे और उन्हें प्रदान किए गए ड्रोन ने ड्रोन प्रौद्योगिकी के माध्यम से उनकी दक्षता और उत्पादकता में वृद्धि करते हुए कृषि की विशिष्टता को आधुनिक कृषि पद्धतियो तक विस्तार किया है। कुल मिलाकर, ड्रोन के उपयोग से एसएचजी गतिविधियों में विविधता आई है, कृषि पद्धतियों में सुधार हुआ है और ग्रामीण समुदायों में महिलाओं के लिए आय के अवसर बढ़े हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button