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छत्तीसगढ़राज्य

भारतीय रेल ने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत पाँच नए सुधारों की घोषणा की; माल ढुलाई, निर्माण और यात्रियों की सुविधा पर बल

दिल्ली। रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि 2026 के दौरान सुधार करने के भारतीय रेल के संकल्प के अनुरूप, पाँच नए सुधारों को स्वीकृति दी गई है। इन नए सुधारों की मंज़ूरी के साथ, वर्ष 2026 के लिए सुधारों की कुल संख्या नौ हो गई है।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वर्तमान “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पहल के तहत, चार सुधारों की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी और अब पाँच नए सुधार पेश किए जा रहे हैं। इन पाँच नए सुधारों में से दो माल ढुलाई से, एक निर्माण से और दो यात्रियों की सुविधा से संबंधित हैं।

नमक के परिवहन में सुधार

पांचवां सुधार नमक के परिवहन पर केंद्रित है। इसके बारे में श्री वैष्णव ने कहा कि भारत दुनिया में नमक के सबसे बड़े उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है। नमक का उत्पादन करने वाले तीन प्रमुख राज्य तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान हैं। भारत में सालाना उत्पादित होने वाले लगभग 35 मिलियन टन नमक में से, लगभग 9.2 मिलियन टन प्रति वर्ष रेल द्वारा पहुँचाया जाता है, जो महत्वपूर्ण और ऐसा अवसर है जिसका अब तक उपयोग नहीं किया गया।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नमक के परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी उसके उपयोग के अनुसार अलग-अलग होती है – औद्योगिक नमक के लिए यह लगभग 25 प्रतिशत है, और मानव उपभोग के लिए इस्तेमाल होने वाले नमक के लिए यह लगभग 65 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे द्वारा पहुँचाए जाने वाले कुल नमक का 62 प्रतिशत हिस्सा 1,000 से 2,500 किलोमीटर की दूरी तय करता है, जिससे यह खंड रेल परिवहन के लिए बेहद उपयुक्त बन जाता है।

श्री वैष्णव ने कहा कि नमक उत्पादकों और ट्रांसपोर्टरों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया ताकि इस क्षेत्र की चुनौतियों को समझा जा सके। इस अध्ययन में कई प्रमुख समस्याओं की पहचान की गई, जिनमें वैगनों का अनुपयुक्त डिज़ाइन, नमक के कारण वैगनों में जंग लगना, तिरपाल से ढके होने के बावजूद खुले वैगनों में पानी का रिसाव होना, और सामान की कई बार लोडिंग-अनलोडिंग (हैंडलिंग) के कारण लागत में वृद्धि और नुकसान होना शामिल हैं।

इन समस्याओं को हल करने के लिए अब स्टेनलेस स्टील से बना, ऊपर से लोड होने वाला और बगल से खाली होने वाला कंटेनर सिस्टम सफलतापूर्वक विकसित किया गया है। यह कंटेनर जंग से बचाने के लिए स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है, और इसमें ऊपर से लोड करने के लिए फ्लैप तथा बगल से खाली करने के लिए हाइड्रोलिक तंत्र लगा है, जिससे गंतव्य स्थान पर ट्रकों में नमक को आसानी से अनलोड किया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नमक उत्पादन वाली जगहों पर सीधे लोडिंग के लिए कंटेनर रखे जा सकते हैं। फिर इन कंटेनरों को उठाकर कंटेनर ट्रेनों में लोड किया जा सकता है। मंज़िल पर पहुँचने पर, कंटेनरों को उतारकर गोदामों या वेयरहाउस में रखा जा सकता है, और ज़रूरत के हिसाब से उन्हें खाली किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम ज़्यादा लचीलापन देता है, बिना किसी रुकावट के कई तरीकों से सामान की आवाजाही में मदद करता है, सामान को संभालने में होने वाले नुकसान को कम करता है, और इंडस्ट्री ने इसे काफी पसंद किया है।

ऑटोमोबाइल ट्रांसपोर्ट में सुधार

भारतीय ऑटोमोबाइल बाज़ार प्रति वर्ष लगभग 31 मिलियन यूनिट बनाता है, जिसमें से यात्री वाहनों की संख्या लगभग 5 मिलियन यूनिट होती है। यात्री वाहनों के ट्रांसपोर्ट में रेल का हिस्सा लगभग 24 प्रतिशत है, जिससे पता चलता है कि ऑटोमोबाइल की आवाजाही का बड़ा हिस्सा अब भी सड़क मार्ग से ही होता है।

श्री वैष्णव ने कहा कि उद्योग से मिले फीडबैक में डिज़ाइन और काम करने से जुड़ी कुछ विशेष रुकावटें सामने आईं। रेलवे जिन बड़े ऑटोमोबाइल उत्पादन केंद्रों को सेवा देता है, उनमें गुजरात का महसाणा; महाराष्ट्र और कर्नाटक के चिंचवाड़ और बिदादी; आंध्र प्रदेश का पेनुकोंडा; तमिलनाडु के मेलपक्कम और वालाजाबाद; और हरियाणा के गुरुग्राम का फरुखनगर शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पहले के प्रयासों में मौजूदा यात्री डिब्बों को ऑटोमोबाइल ले जाने वाले वैगनों में बदलना और नए समाधान लाना शामिल था। हालाँकि, बाद में विचार विमर्श से पता चला कि मुख्य समस्या ऑटोमोबाइल ले जाने वाले वैगनों के डिज़ाइन में थी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मौजूदा वैगन डिज़ाइन या तो सिंगल-स्टैक या डबल-स्टैक बनावट के लिए ही ठीक थे, जिससे लचीलापन कम हो जाता था। उन्होंने यह भी कहा कि कई रास्तों पर सुरंगों और पुलों की वजह से रुकावटें आती हैं, जहाँ ‘शेड्यूल ऑफ़ डाइमेंशन्स’ (एसओडी) की सीमाओं के कारण कुछ विशेष प्रकार के वैगनों की आवाजाही संभव नहीं हो पाती।

वैष्णव ने कहा कि इस समस्या को हल करने के लिए रेलवे ने एक सुधार लागू किया है, जिसके तहत वैगनों के विशेष डिज़ाइन की अनुमति दी गई है और साथ ही उद्योग को लचीलापन भी प्रदान किया गया है। अब निर्माता विशिष्ट मूल-गंतव्य मार्गों के आधार पर, उच्च क्षमता वाले वैगनों का डिज़ाइन तैयार कर सकते हैं।

पिछली थोक सीमेंट नीति सुधार के असर का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि लागू किए गए बदलावों से लोडिंग में तुरंत बढ़ोतरी हुई। रेल से ले जाए जाने वाले थोक सीमेंट की मात्रा सितंबर 2025 में लगभग 37,000 टन से बढ़कर जनवरी 2026 तक लगभग 95,000 टन हो गई। उन्होंने इसी तरह की उम्मीद ज़ाहिर की कि नमक और ऑटोमोबाइल परिवहन में किए गए सुधारों से इन क्षेत्रों में रेल माल ढुलाई की हिस्सेदारी में काफ़ी सुधार होगा।

निर्माण की गुणवत्ता में सुधार

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अगला सुधार रेल परियोजनाओं में निर्माण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर केंद्रित है, जिसमें सात बड़े बदलाव किए गए हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पहला बदलाव पात्रता मानदंडों से जुड़ा है। किसी एक परियोजना के ज़रिए ठेकेदार की क्षमता का आकलन करने की सीमा को परियोजना के मूल्य के 35 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि केवल वही कंपनियाँ ऐसे कामों के लिए बोली लगा सकें जो बड़ी परियोजनाओं को पूरा करने की सिद्ध क्षमता रखती हैं । इसके अलावा, पिछले अनुभव का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा रेलवे से जुड़े कार्यों में होना ज़रूरी है, क्योंकि यह माना जाता है कि राजमार्ग, बंदरगाह और हवाई अड्डों जैसे अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी अलग-अलग जटिलताएँ होती हैं। रेलवे के कार्यों में जटिलता के स्तरों को परिभाषित किया गया है; सिग्नलिंग का काम सबसे जटिल माना गया है, जिसके बाद ओवरहेड इलेक्ट्रिकल और ट्रैक के काम आते हैं, और इसी के अनुसार संबंधित अनुभव की ज़रूरत होगी।

दूसरा बदलाव बोली सुरक्षा को परियोजना के मूल्य के 2 प्रतिशत पर निर्धारित करता है। इसका उद्देश्य बेतुकी बोलियों को हतोत्साहित करना और यह सुनिश्चित करना है कि केवल गंभीर प्रतिभागी ही निविदा प्रक्रिया में शामिल हों।

तीसरा बदलाव ₹10 करोड़ से अधिक की सभी परियोजनाओं के लिए बोली क्षमता के अनिवार्य आकलन की शुरुआत करना है। चौथा बदलाव भ्रष्ट, धोखाधड़ी वाले और प्रतिस्पर्धा-विरोधी तरीकों पर रोक लगाने वाले कड़े दंडात्मक प्रावधानों को लागू करता है।

पाँचवाँ बदलाव किसी भी परियोजना के शुरू होने से पहले विस्तृत कार्य योजना को अनिवार्य बनाता है, जिससे बेहतर निगरानी हो सके और समय पर काम पूरा होना सुनिश्चित हो सके।

छठा बदलाव उप-ठेकेदारी की अनुमत सीमा को 70 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करता है। ठेकेदारों को अब अपने स्वयं के पर्यवेक्षण में कम से कम 60 प्रतिशत काम सीधे तौर पर करना होगा। इससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी और बोली जीतने के बाद ठेकों को दूसरों को सौंपने की प्रथा में कमी आएगी।

सातवाँ बदलाव ‘प्रीडेटरी बिडिंग’ (अत्यधिक कम बोली लगाने) की समस्या का समाधान करता है। रेल मंत्री ने कहा कि यदि कोई बोली अनुमानित परियोजना लागत से 5 प्रतिशत से अधिक कम है, तो बोली लगाने वाले को अतिरिक्त 5 प्रतिशत की ‘परफॉर्मेंस गारंटी’ (कार्य-निष्पादन गारंटी) देनी होगी। इसका उद्देश्य उन अवास्तविक बोलियों को हतोत्साहित करना है जिनके कारण बाद में विवाद, मध्यस्थता और परियोजना में देरी होती है।

ये बदलाव मिलकर रेल परियोजनाओं को लागू करने की रूपरेखा को मज़बूत बनाते हैं। ये सख़्त नैतिक और दंडात्मक उपायों के ज़रिए पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ाते हैं; सख़्त पात्रता नियमों और कम उप-ठेकेदारी (सब-कॉन्ट्रैक्टिंग) के ज़रिए गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं; और तय बोली सुरक्षा, बोली क्षमता का आकलन, और अतिरिक्त परफॉर्मेंस गारंटी जैसे तरीकों से परियोजना के समय पर काम पूरा होने को बढ़ावा देते हैं। कुल मिलाकर, इन कदमों का उद्देश्य अधिक जवाबदेह, कुशल और मज़बूत अवसंरचना विकास प्रणाली बनाना है।

टिकट रद्द करना और रिफंड

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आठवां सुधार यात्री सुविधा पर केंद्रित है, जिसमें टिकटिंग सिस्टम के गलत इस्तेमाल को रोकने और असली यात्रियों के लिए पहुंच बेहतर बनाने के उपाय शामिल हैं।

श्री वैष्णव ने कहा कि टिकटों की कालाबाज़ारी और तत्काल सिस्टम का गलत इस्तेमाल बड़ी चिंता का विषय रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए, रेलवे ने बॉट और धोखाधड़ी वाले सॉफ्टवेयर का पता लगाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया। आधुनिक तकनीकी उपायों ने तत्काल विंडो खुलते ही तुरंत टिकट बुक करने की एजेंटों और दलालों की क्षमता पर रोक लगा दी, साथ ही आधार-आधारित ओटीपी वेरिफिकेशन भी शुरू किया गया। विस्तृत डेटा विश्लेषण के आधार पर आईआरसीटीसी सिस्टम से लगभग 3 करोड़ नकली खातों की पहचान करके उन्हें हटा दिया गया। इसके परिणामस्वरूप टिकटों की उपलब्धता में काफ़ी सुधार हुआ।

इस समस्या से निपटने के लिए, प्रस्थान से 48, 12 और 4 घंटे पहले टिकट रद्द करने की पुरानी समय-सीमा को बदलकर अब 72, 24 और 8 घंटे कर दिया गया है। यह बदलाव आरक्षण चार्ट तैयार करने की प्रक्रिया के अनुरूप किया गया है, जो अब प्रस्थान से 4 घंटे पहले के बजाय 9 से 18 घंटे पहले तैयार किया जाता है। यात्रियों से इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। आरक्षण चार्ट पहले से तैयार होने से यात्रियों को होने वाली अनिश्चितता कम होती है, जिससे प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) वाले यात्री बेहतर योजना बना पाते हैं और दूरदराज के इलाकों से आने वाले यात्रियों को भी सुविधा मिलती है। चार्ट पहले से तैयार होने से यात्रा के वैकल्पिक इंतज़ाम करना आसान हो जाता है, खाली बर्थ का बेहतर इस्तेमाल हो पाता है और पारदर्शिता भी बढ़ती है। इन बदलावों का उद्देश्य आखिरी समय में अटकल या अंदाज़े के आधार पर की जाने वाली बुकिंग को हतोत्साहित करना और यह सुनिश्चित करना है कि टिकट असली यात्रियों को ही मिलें।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी घोषणा की कि अब देश के किसी भी रेलवे स्टेशन से काउंटर टिकट रद्द किए जा सकेंगे। इसके साथ ही, टिकट केवल उस स्टेशन पर ही रद्द करने की पुरानी पाबंदी को भी हटा दिया गया है, जहां से यात्रा शुरू होनी थी। उन्होंने बताया कि ई-टिकट के लिए ‘टिकट डिपॉज़िट रसीद’ (टीडीआर) जमा करने की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया गया है, और अब टिकट रद्द करने पर रिफंड अपने आप ही मिल जाएगा। यात्रियों के हित में एक और कदम उठाते हुए, अब यात्री प्रस्थान से 30 मिनट पहले तक अपनी यात्रा की श्रेणी (क्लास) को अपग्रेड कर सकेंगे; जबकि पहले यह बदलाव केवल चार्ट तैयार होने से पहले तक ही संभव था।

रेल मंत्री ने कहा कि इन सुधारों से रेलवे टिकटिंग प्रणाली में पारदर्शिता और बढ़ेगी, गलत इस्तेमाल या दुरुपयोग में कमी आएगी और यात्रियों का अनुभव भी बेहतर होगा।

ट्रेन के बोर्डिंग पॉइंट में बदलाव

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नौवां सुधार यात्रियों को रेलगाड़ी के शुरुआती स्टेशन से रवाना होने से 30 मिनट पहले तक डिजिटल रूप से अपना बोर्डिंग स्टेशन बदलने की सुविधा देता है। उन्होंने बताया कि पहले यात्री चार्ट तैयार होने से पहले ही बोर्डिंग पॉइंट बदल सकते थे। नए प्रावधान के तहत, यदि कोई यात्री शुरुआती स्टेशन से रेलगाड़ी में सवार नहीं हो पाता है, तो वह अगला सुविधाजनक स्टेशन चुन सकता है और अपनी कन्फर्म सीट खोए बिना रेलगाड़ी में सवार हो सकता है।

पिछले सुधारों की अद्यतन जानकारी

पिछले सुधारों में बेहतर ऑन-बोर्ड सेवाओं के लिए सुधार, माल ढुलाई के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बेहतर सुविधाओं वाले ‘गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों’ का विस्तार, ‘रेलटेक नीति और पोर्टल’, और दावों के त्वरित व कागज़-रहित निपटान के लिए ‘रेलवे दावा अधिकरण’ (e-RCT) का डिजिटलीकरण शामिल है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सामान्य और अनारक्षित डिब्बों के लिए ऑन-बोर्ड सफाई सेवाओं को मिशन के रूप में शुरू किया गया है। सभी ज़ोनल रेलवे में कुल 86 रेलगाड़ियों की पहचान की गई है। पैनल में शामिल करने के लिए ‘अभिरुचि की अभिव्यक्ति’ 5 ज़ोनल रेलवे द्वारा पहले ही जारी की जा चुकी है। कार्गो सुधारों के बारे में उन्होंने कहा कि ‘गति शक्ति कार्गो टर्मिनल नीति’ में किए गए बदलावों को अधिसूचित कर दिया गया है और संशोधित ढांचे के तहत नए आवेदनों पर कार्रवाई की जा रही है।

हाल ही में शुरू की गई ‘रेलटेक नीति’ का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक महीने के भीतर 123 प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से 94 को अगले चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है।

अंत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य परिचालन दक्षता में सुधार करना, यात्रियों की सुविधा बढ़ाना और रेलवे क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देना है।

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