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मोटे अनाज कोदो-कुटकी, मक्का-बाजरा और जौ से बने व्यंजन आगंतुकों के मन को खूब भाये

भोपाल। वन विभाग एवं राज्य लघु वनोपज, सहकारी संघ मर्यादित द्वारा भोपाल के लाल परेड ग्राउण्ड पर 17 से 23 दिसम्बर तक अंतर्राष्ट्रीय वन मेले का आयोजन किया गया। मेले में प्रतिदिन लोगों का रुझान बढ़ता जा रहा है। मोटे अनाज कोदो-कुटकी, मक्का-बाजरा और जौ से बने व्यंजन आगंतुकों के मन को खूब भाये। वन मेले में आज 50 हजार से अधिक आगंतुकों ने भ्रमण किया। मेले में वन एवं हर्बल उत्पादों से निर्मित औषधियों की 40 लाख रुपये से अधिक की बिक्री हुई।

अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में 90 पारम्परिक एवं आयुर्वेदिक वैद्य चिकित्सकों से लगभग 450 आगंतुकों ने नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श प्राप्त कर लाभ लिया। इस बार मेले में आँवला एवं आँवले से बने उत्पाद जैसे आँवला केण्डी, अचार, सुपारी और शहद, हर्बल टी, अर्जुन चाय, गुड़ तथा बाँस के ब्रश से लेकर सोफा, कुर्सियाँ, लकड़ी के खिलौने, गुड्डे-गुड़िया एवं हर्बल जड़ी-बूटियों की माँग अधिक रही।

लघु वनोपज संघ द्वारा सुदूर वनांचलों में निवासरत अनुसूचित जनजाति एवं अन्य समुदायों को बिचौलियों के शोषण से बचाने और उन्हें उचित लाभ दिलाने के लिये वनोपज विक्रय का लाभांश संग्राहकों को वितरित करने के निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। वन मेले के इस आयोजन ने बिक्री, आगंतुकों की संख्या एवं क्रेता-विक्रेता सम्मेलन के माध्यम से होने वाले एमओयू जैसे घटकों में गत वर्ष के मुकाबले दोगुनी सफलता हासिल की है। इस बार मेले में स्थापित 300 स्टॉलों से वन, हर्बल उत्पादों एवं औषधियों की बिक्री की जा रही है।

अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें फैंसी ड्रेस, सोलो एक्टिंग, महिला यूनिक बैण्ड की आकर्षक प्रस्तुति और एक शाम वन विभाग के नाम की मनमोहक प्रस्तुति दी गयी।

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