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स्वस्थ मस्तिष्क: स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी पूँजी

सुबह आँख खुलते ही हम सोचते हैं, बोलते हैं, मुस्कुराते हैं, अपने प्रियजनों को पहचानते हैं और अपने दिन की शुरुआत करते हैं। इन सभी कार्यों के पीछे एक अद्भुत अंग है—हमारा मस्तिष्क।

विडंबना यह है कि हम अपने हृदय, किडनी या लीवर के बारे में तो अक्सर सोचते हैं, लेकिन मस्तिष्क की देखभाल के बारे में तब तक गंभीर नहीं होते, जब तक कोई समस्या सामने न आ जाए।

विश्व मस्तिष्क दिवस, जो प्रत्येक वर्ष 22 जुलाई को मनाया जाता है, हमें यही याद दिलाता है कि मस्तिष्क स्वस्थ होगा, तभी जीवन स्वस्थ, स्वतंत्र और सार्थक होगा। वर्ष 2026 का विषय है— “Brain Health: Access for All” (सभी के लिए मस्तिष्क स्वास्थ्य)। इसका संदेश है कि प्रत्येक व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी गाँव, शहर या आर्थिक वर्ग से हो, मस्तिष्क संबंधी रोगों की जानकारी, समय पर जाँच, उपचार और पुनर्वास की सुविधा मिलनी चाहिए।

आज विश्वभर में स्ट्रोक, डिमेंशिया, मिर्गी, पार्किंसन रोग और माइग्रेन जैसी तंत्रिका संबंधी बीमारियाँ करोड़ों लोगों को प्रभावित कर रही हैं। इनमें से अनेक रोगों का खतरा कम किया जा सकता है यदि हम समय रहते अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें।

यदि मुझे केवल एक ही सलाह देनी हो, तो मैं कहूँगा—

“अपने रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) को नियंत्रित रखें।”

उच्च रक्तचाप को “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि यह वर्षों तक बिना किसी लक्षण के मस्तिष्क की रक्त वाहिनियों को नुकसान पहुँचाता रहता है। यही कारण है कि यह स्ट्रोक, याददाश्त में कमी और वैस्कुलर डिमेंशिया का एक प्रमुख कारण है। अच्छी बात यह है कि नियमित जाँच, स्वस्थ जीवनशैली और आवश्यकता होने पर दवाओं के नियमित सेवन से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

वैज्ञानिक शोध हमें यह भी बताते हैं कि जो हृदय के लिए अच्छा है, वही मस्तिष्क के लिए भी अच्छा है।

मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए पाँच सरल आदतें अपनाइए—

  • ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें।
  • प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तेज़ चाल से चलें या व्यायाम करें।
  • फल, हरी सब्जियाँ, साबुत अनाज और संतुलित भोजन लें; नमक और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ कम करें।
  • तंबाकू और धूम्रपान से पूरी तरह दूर रहें तथा शराब का सेवन सीमित रखें।
  • पर्याप्त नींद लें, मानसिक रूप से सक्रिय रहें और परिवार तथा मित्रों के साथ जुड़े रहें।

इसके साथ ही स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानना भी अत्यंत आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति का चेहरा अचानक टेढ़ा हो जाए, हाथ या पैर में कमजोरी आ जाए, बोलने में कठिनाई हो या अचानक संतुलन और दृष्टि प्रभावित हो जाए, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर समय न गँवाएँ। तुरंत अस्पताल पहुँचें। स्ट्रोक के उपचार में हर मिनट अमूल्य होता है।

मस्तिष्क की सुरक्षा केवल डॉक्टरों की जिम्मेदारी नहीं है। यह हमारी, हमारे परिवार की और पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। स्वस्थ आदतें, समय पर जाँच और सही जानकारी—यही सबसे प्रभावी उपचार हैं।

इस विश्व मस्तिष्क दिवस पर आइए एक संकल्प लें—

अपने मस्तिष्क को उतनी ही प्राथमिकता देंगे, जितनी अपने हृदय को देते हैं।

क्योंकि जब मस्तिष्क स्वस्थ रहता है, तभी हमारी यादें सुरक्षित रहती हैं, हमारी सोच स्पष्ट रहती है और हमारा भविष्य उज्ज्वल बनता है।

याद रखिए—स्वस्थ मस्तिष्क ही स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है।

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