छत्तीसगढ़राज्य

नवाचार की मिसाल : पोटाकेबिन में ‘वेस्ट वॉटर मैनेजमेंट’ के जरिए लहलहा उठी बगिया

“स्किल डेवलपमेंट“और “पर्यावरण संरक्षण“ के विजन को धरातल पर उतारते हुए कोण्टा ब्लॉक मुख्यालय में स्थित शासकीय बालक हाईस्कूल (पोटाकेबिन) ने एक सराहनीय उदाहरण पेश किया है। यहाँ के प्राचार्य और शिक्षकों ने सीमित संसाधनों और पानी की कमी के बावजूद श्वेस्ट वाटर मैनेजमेंटश् की ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसने न केवल 100 पौधों को जीवनदान दिया है, बल्कि छात्रों के लिए व्यावहारिक शिक्षा का एक नया द्वार भी खोल दिया है।

बेकार बहते पानी का मास्टर प्लान
संस्था परिसर के समीप स्थित एकलव्य विद्यालय से व्यर्थ बहकर जाने वाले पानी को सहेजने के लिए प्राचार्य ने एक अनूठी कार्ययोजना बनाई। संसाधनों की कमी को आड़े न आने देते हुए, प्राचार्य और उनके सहयोगी शिक्षकों ने श्कबाड़ से जुगाड़श् तकनीक का उपयोग किया। इसमें पुराने बेकार पड़े पाइपों और मात्र आधे हॉर्सपावर के टुल्लू पंप के मेल से एक प्रभावी ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) सिस्टम तैयार किया गया।

छात्रों के लिए “लाइव लैब“ बना स्कूल
यह प्रयास केवल पौधों को पानी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के कौशल विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। छात्र अब अपने घरों और किचन गार्डन में नालों के व्यर्थ पानी का उपयोग कर सब्जी उत्पादन की तकनीक सीख रहे हैं। यह नवाचार बच्चों में पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक और व्यावसायिक कृषि के प्रति रुचि जगा रहा है।
प्रशासन का दृष्टिकोणः ईको-फ्रेंडली वातावरण और स्किलिंग

संस्था के इस सामूहिक प्रयास से स्कूल परिसर “ईको-फ्रेंडली“ जोन में तब्दील हो गया है। प्रशासन ऐसे प्रयासों की सराहना करता है, क्योंकि यह न केवल सरकारी योजनाओं को सफल बनाते हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के सर्वाेत्तम उपयोग की प्रेरणा भी देते हैं।

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