
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आजादी के बाद भारत के लोकतंत्र को जीवंत और मजबूत बनाए रखने में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। देश की गौरवशाली न्यायिक परंपरा, बार और बेंच के बीच समन्वय तथा संविधान के प्रति प्रतिबद्धता ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती प्रदान की है। दुनिया के कई देशों में राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के बीच भारत सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में मजबूती से खड़ा है। इसका श्रेय हमारी न्यायपालिका और न्याय परंपरा को जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को जबलपुर में महाधिवक्ता कार्यालय द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे का अभिनंदन किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की न्याय परंपरा केवल संवैधानिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति, साहित्य और सामाजिक जीवन में भी न्याय के आदर्श गहराई से जुड़े हुए हैं। मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘पंच परमेश्वर’ से लेकर ‘मदर इंडिया’ जैसी फिल्मों तक में न्याय, नैतिकता और कर्तव्य के उदाहरण देखने को मिलते हैं। यह भारतीय समाज में न्याय और नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा ने अनेक कठिन दौर देखे हैं। आपातकाल के समय भी न्यायपालिका की भूमिका और उसके फैसले देश के लोकतांत्रिक इतिहास में महत्वपूर्ण रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं ने लोकतंत्र की मूल भावना को बनाए रखने में योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की न्याय व्यवस्था को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए अंग्रेजों के जमाने के पुराने कानूनों को समाप्त कर नए कानून लागू किए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में भी हमारी सरकार ने 900 से अधिक अनुपयोगी कानून समाप्त किए हैं। इनमें कई ऐसे पुराने कानून थे, जिनकी वर्तमान समय में कोई उपयोगिता नहीं रह गई थी। ऐसे कानूनों को समाप्त कर शासन व्यवस्था को समयानुकूल बनाने का प्रयास किया गया है।


