छत्तीसगढ़राज्य

आज है करवा चौथ का पर्व, चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा

करवा चौथ का पर्व गुरुवार, 29 अक्टूबर को देशभर में पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से जुड़ा यह पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखता है। इस अवसर पर विवाहित महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण कर व्रत का संकल्प लेती हैं और दिनभर उपवास रखकर शाम को विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं।

करवा चौथ केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और आपसी समर्पण की भावना को अभिव्यक्त करने का अवसर भी है। इस दिन महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजकर हाथों में मेहंदी रचाती हैं और सोलह शृंगार कर पूजा की तैयारियां करती हैं। शाम को करवा चौथ की कथा सुनने और पूजा करने के बाद सभी को चंद्रमा के उदय होने का इंतजार रहता है।

चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा
करवा चौथ की पूजा में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं पूजा की थाली सजाकर कथा सुनती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करती हैं। इसके बाद छलनी से चंद्र दर्शन और पति का चेहरा देखने की परंपरा निभाई जाती है। पूजा संपन्न होने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधियों में कुछ अंतर हो सकता है।

समय के साथ बदलती परंपराएं
आधुनिक दौर में करवा चौथ का स्वरूप भी बदल रहा है। कई परिवारों में पति भी पत्नी के प्रति सहयोग और सहभागिता प्रदर्शित करते हुए व्रत रखते हैं। बदलते सामाजिक परिवेश में यह पर्व आपसी सम्मान, भावनात्मक जुड़ाव और रिश्तों में समान भागीदारी का संदेश भी देता है।

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