छत्तीसगढ़राज्य

रसायन विज्ञान एवं भौतिकी के विद्यार्थियों ने आधुनिक फोरेंसिक विज्ञान की तकनीकों का किया अध्ययन

राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के शैक्षणिक भ्रमण से लगभग 50 विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अनुसंधान एवं विश्लेषण की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त

रायपुर। वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक एवं साक्ष्य-आधारित विश्लेषण के बढ़ते महत्व को ध्यान में रखते हुए शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर के एम.एससी. रसायन विज्ञान एवं एम.एससी. भौतिकी तृतीय सेमेस्टर के लगभग 50 विद्यार्थियों ने राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, रायपुर का एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को वैज्ञानिक परीक्षणों एवं विश्लेषणात्मक प्रक्रियाओं की प्रत्यक्ष जानकारी प्रदान करना था।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरिश कांत पांडेय* ने इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण को दोनों विभागों के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया। उन्होंने कहा कि विज्ञान का अध्ययन केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में अनुसंधानपरक सोच, विश्लेषणात्मक क्षमता एवं व्यावहारिक कौशल विकसित करना भी आवश्यक है। वैज्ञानिक संस्थानों का प्रत्यक्ष अनुभव विद्यार्थियों को अपने पाठ्यक्रम में अर्जित ज्ञान और उसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों के बीच संबंध स्थापित करने में सहायता करता है।

रसायन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गोवर्धन व्यास ने बताया कि इस शैक्षणिक भ्रमण में रसायन विज्ञान विभाग से डॉ. यामिनी ठाकुर, डॉ. रेखा सोनी एवं डॉ. भारती मनीष पारधी तथा भौतिकी विभाग से डॉ. लखपति पटेल, डॉ. रत्नमाला गांजिर, सुश्री रोशनी वर्मा एवं श्री पंकज कुमार विद्यार्थियों के साथ उपस्थित रहे। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों, विभिन्न नमूनों के विश्लेषण तथा न्यायालयिक जाँच में रसायन विज्ञान, भौतिकी एवं अन्य वैज्ञानिक विषयों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, रायपुर के संयुक्त निदेशक डॉ. एच.एस. भवारा एवं डॉ. शिखा तिवारी के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को प्रयोगशाला के विभिन्न वैज्ञानिक अनुभागों की कार्यप्रणाली, आधुनिक परीक्षण तकनीकों तथा प्रयोगशाला में अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों से परिचित कराया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि वैज्ञानिक जाँच में सटीकता, निष्पक्षता, व्यवस्थित प्रक्रियाओं एवं विश्वसनीय परिणामों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।

भौतिकी अनुभाग में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार साहू ने पदार्थों की पहचान, धातुओं की शुद्धता के परीक्षण तथा सूक्ष्म संरचनाओं के विश्लेषण में प्रयुक्त आधुनिक उपकरणों की जानकारी दी। विद्यार्थियों ने स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (SEM) एवं ऊर्जा-विक्षेपी एक्स-रे प्रतिदीप्ति तकनीक (EDXRF) के कार्यसिद्धांतों एवं अनुप्रयोगों को समझा। इन तकनीकों के माध्यम से पदार्थों की सूक्ष्म संरचना एवं उनमें उपस्थित विभिन्न तत्वों की संरचना का विश्लेषण किस प्रकार किया जाता है, इसकी जानकारी विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी रही।

न्यायालयिक मनोविज्ञान अनुभाग में डॉ. एच.एस. भवारा ने न्यायालयिक मनोविज्ञान के महत्व, उसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों तथा न्यायिक जाँच में मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण की भूमिका से विद्यार्थियों को अवगत कराया। इस सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों ने समझा कि विभिन्न विषयों का ज्ञान न्यायालयिक जाँच में भौतिक एवं रासायनिक साक्ष्यों के विश्लेषण को किस प्रकार पूरक बनाता है।

रसायन विज्ञान एवं विषविज्ञान अनुभाग में वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. संदीप वैष्णव ने विभिन्न नमूनों के रासायनिक विश्लेषण, संदिग्ध पदार्थों की पहचान तथा विषविज्ञान संबंधी जाँच में रसायन विज्ञान की भूमिका को स्पष्ट किया। उन्होंने गैस क्रोमैटोग्राफी एवं मास स्पेक्ट्रोमेट्री जैसी आधुनिक विश्लेषणात्मक तकनीकों के अनुप्रयोगों की जानकारी दी। विद्यार्थियों ने जाना कि नमूनों में उपस्थित रासायनिक पदार्थों की अत्यंत सूक्ष्म मात्रा की पहचान एवं सटीक विश्लेषण न्यायिक जाँच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जीवविज्ञान अनुभाग में संयुक्त निदेशक डॉ. एस.के. सिंह एवं वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. वसीम ने जैविक साक्ष्यों के वैज्ञानिक विश्लेषण तथा न्यायालयिक जाँच में जीवविज्ञान के अनुप्रयोगों की जानकारी दी। डीएनए इकाई में डॉ. जिप्सी चंद्रा ने विद्यार्थियों को डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के वैज्ञानिक सिद्धांतों, डीएनए परीक्षण की प्रक्रिया तथा आपराधिक जाँच एवं न्यायिक कार्यवाही में इसके उपयोगों से परिचित कराया। विद्यार्थियों को पीसीआर (PCR), स्वचालित डीएनए निष्कर्षण उपकरणों तथा जेनेटिक एनालाइजर जैसी आधुनिक तकनीकों की कार्यप्रणाली के बारे में भी बताया गया।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने प्रयोगशाला के विभिन्न अनुभागों की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया तथा यह समझा कि रसायन विज्ञान, भौतिकी, जीवविज्ञान एवं अन्य वैज्ञानिक विषयों का समन्वय न्यायालयिक अनुसंधान को किस प्रकार अधिक प्रभावी बनाता है। रसायन विज्ञान के विद्यार्थियों ने रासायनिक विश्लेषण एवं विषविज्ञान संबंधी परीक्षणों के अनुप्रयोगों की जानकारी प्राप्त की, जबकि भौतिकी के विद्यार्थियों ने पदार्थों की पहचान, सूक्ष्म संरचनाओं के अध्ययन तथा वैज्ञानिक उपकरणों के उपयोग को समझा। इस संयुक्त शैक्षणिक अनुभव से दोनों विषयों के विद्यार्थियों की अंतर्विषयक समझ विकसित हुई।

भ्रमण के दौरान डॉ. यामिनी ठाकुर एवं डॉ. लखपति पटेल ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया तथा विभिन्न अनुभागों की गतिविधियों, वैज्ञानिक उपकरणों के उपयोग एवं परीक्षण प्रक्रियाओं को समझने में उनकी सहायता की। भ्रमण के पश्चात आयोजित संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, अनुसंधान के अवसरों एवं न्यायालयिक विज्ञान में अपने-अपने विषयों की भूमिका से संबंधित प्रश्न पूछे। इस चर्चा ने विद्यार्थियों को अपने अवलोकनों को वैज्ञानिक अवधारणाओं से जोड़ने तथा भविष्य की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योजनाओं पर विचार करने का अवसर प्रदान किया।

भ्रमण के समापन अवसर पर संयुक्त निदेशक डॉ. एस.के. सिंह ने वैज्ञानिक अनुसंधान में सटीकता, निष्पक्षता एवं नैतिक उत्तरदायित्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकें तभी प्रभावी सिद्ध हो सकती हैं, जब उनका उपयोग निर्धारित मानकों एवं विश्वसनीय प्रक्रियाओं के अनुरूप किया जाए। उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने, अपने तकनीकी ज्ञान को निरंतर अद्यतन रखने तथा ईमानदारी एवं जिम्मेदारी के साथ अनुसंधान कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

महाविद्यालय की पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. अंजलि भटनागर ने कहा कि सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव भी विषयों की बेहतर समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक पहल न केवल विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्धि करती है, बल्कि उन्हें रोजगार के उभरते अवसरों की खोज करने तथा अनुसंधान के क्षेत्र में अपना करियर बनाने के लिए भी प्रेरित करती है।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरिश कांत पांडेय ने राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशकों डॉ. टी.एल. चंद्रा एवं डॉ. एच.एस. भवरा, डॉ. शिखा तिवारी तथा प्रयोगशाला के समस्त वैज्ञानिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों को सहयोग एवं बहुमूल्य मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए सभी का धन्यवाद किया, जिससे यह शैक्षणिक भ्रमण सफल हो सका। उन्होंने रसायन विज्ञान एवं भौतिकी विभागों को भविष्य में भी इस प्रकार के ज्ञानवर्धक शैक्षणिक भ्रमण एवं अनुसंधानपरक गतिविधियों का आयोजन करने के लिए प्रोत्साहित किया।

यह शैक्षणिक भ्रमण एम.एससी. रसायन विज्ञान एवं एम.एससी. भौतिकी तृतीय सेमेस्टर के लगभग 50 विद्यार्थियों के लिए आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ। इस भ्रमण से विद्यार्थियों को अपने-अपने विषयों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों, उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों तथा न्यायालयिक विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्ध अनुसंधान अवसरों की जानकारी प्राप्त हुई। इस अनुभव ने विद्यार्थियों को अपने भविष्य के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक लक्ष्यों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, नवाचार तथा कौशल विकास को सम्मिलित करने के लिए भी प्रेरित किया।

 

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