छत्तीसगढ़राज्य

नीलू शर्मा के पहल से पर्यटन को मिली नई उड़ान, निवेश से रोजगार तक पर जोर

रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र के विस्तार की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने पर्यटन को रोजगार, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए अगले कुछ वर्षों के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं तैयार की हैं। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028 तक छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाना है।

पर्यटन में निजी निवेश को बढ़ावा

पिछले करीब ढाई वर्षों में पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश आकर्षित करने के लिए कई पहल की गई हैं। फिल्म सिटी निर्माण के लिए अब तक 203 करोड़ 53 लाख रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सरकार इसे प्रदेश में पर्यटन और फिल्म उद्योग के बढ़ते आकर्षण के संकेत के रूप में देख रही है।

फिल्म पर्यटन और बड़े आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए फिल्म सिटी के साथ कन्वेंशन सेंटर विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इस पूरी परियोजना का अनुमानित आकार करीब 350 करोड़ रुपए बताया गया है।

50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए धार्मिक स्थल के दर्शन
राज्य सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना भी शामिल है। IRCTC के सहयोग से अब तक 61 ट्रेनों का संचालन किया जा चुका है। इनके माध्यम से 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या और काशी के दर्शन कराए गए हैं।

सरकार का उद्देश्य प्रदेशवासियों के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को अधिक सुलभ, व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना है। इसके साथ ही प्रदेश के धार्मिक स्थलों को बेहतर पर्यटन सुविधाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

होमस्टे से स्थानीय परिवारों को मिलेगा लाभ
सरकार पर्यटन के आर्थिक लाभ को स्थानीय समुदाय तक पहुंचाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके लिए होमस्टे को बढ़ावा देने की योजना है, ताकि पर्यटकों को स्थानीय जीवन, खान-पान और संस्कृति का अनुभव मिले और स्थानीय परिवारों को सीधे आय का अवसर मिल सके। स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को पर्यटन से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे पर्यटन को केवल घूमने-फिरने तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय अर्थव्यवस्था का माध्यम बनाने की कोशिश है।

युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
पर्यटन कारोबार के औपचारिक पंजीकरण में भी वृद्धि हुई है। वर्तमान में प्रदेश में 390 से अधिक टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट और 26 होटल पंजीकृत हैं। सरकार का विशेष ध्यान युवाओं के कौशल विकास पर है। पर्यटक गाइड, आतिथ्य सेवा, फिल्म निर्माण, पर्यटन संचालन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर कम से कम 500 स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

बस्तर से सिरपुर तक पर्यटन विकास पर जोर
छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास में बस्तर को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। सरकार चित्रकोट को केवल जलप्रपात के रूप में नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करना चाहती है। इसके लिए पर्यटकों की सुविधाओं और पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसी तरह सिरपुर के व्यापक पर्यटन विकास के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। मैनपाट और जशपुर जैसे प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में भी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने तथा पर्यटकों के अनुभव को समृद्ध करने की योजना है।

धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को मिलेगा नया स्वरूप
प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता दिलाना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। भोरमदेव कॉरिडोर के विकास के लिए केंद्र सरकार ने 145 करोड़ 99 लाख रुपए की मंजूरी दी है। इसके अलावा रतनपुर के महामाया मंदिर क्षेत्र और चंपारण्य के विकास के लिए भी केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजे गए हैं। इन परियोजनाओं के जरिए धार्मिक स्थलों के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद है।

मोबाइल से शुरू होगी पर्यटक की यात्रा
डिजिटल दौर में पर्यटन को तकनीक से जोड़ने पर भी सरकार का फोकस है। पर्यटन विभाग की नई वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग, डिजिटल जानकारी और पर्यटन सुविधाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से करीब 6 करोड़ 48 लाख रुपए तथा पर्यटन इकाइयों से लगभग 31 करोड़ 75 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। इससे डिजिटल माध्यम से पर्यटन सेवाओं की बढ़ती मांग का संकेत मिलता है।

अगले पांच साल में हर साल 100 करोड़ का प्रावधान
सरकार अब पर्यटन विकास के अगले चरण को और व्यापक बनाने की तैयारी में है। वर्ष 2028 तक छत्तीसगढ़ की पर्यटन पहचान को देश-दुनिया में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत अगले पांच वर्षों में प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपए के वित्तीय प्रावधान की दिशा में काम किया जा रहा है। साथ ही पर्यटन नीति 2026 प्रस्तावित है, जिसमें सतत पर्यटन विकास, निजी निवेश, समुदाय आधारित पर्यटन और स्थानीय भागीदारी को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

18 पर्यटन संपत्तियां निजी क्षेत्र से होंगी विकसित

पर्यटन क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को लीज-सह-विकास मॉडल के तहत निजी क्षेत्र की मदद से विकसित करने की योजना है। सरकार के अनुसार इससे करीब 500 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित हो सकता है। साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर होगी छत्तीसगढ़ की ब्रांडिंग

सरकार अब प्रदेश की पर्यटन पहचान को राष्ट्रीय स्तर से आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की तैयारी कर रही है। छत्तीसगढ़ को विशेष रूप से इको-एथनिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की योजना है। इसके लिए बर्लिन, लंदन, दुबई और स्पेन जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर प्रदेश की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। फिल्म और OTT के माध्यम से प्रचार, अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटरीच तथा विदेशी पर्यटकों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए फेम टूर जैसे प्रयास भी किए जाएंगे।

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