दिल्लीराज्य

दिल्ली-एनसीआर में ट्रकों और बसों को आधुनिक बनाने ‘परिवर्तन’ योजना

कई दशकों से, दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में हवा की खराब होती गुणवत्ता पर्यावरण से संबंधित सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रही है। भले ही यात्री वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने हेतु उल्लेखनीय कदम उठाए गए हैं, लेकिन पुराने हो चुके व्यावसायिक वाहन – खासकर ट्रक और बस – अभी भी कणिका तत्वों (पीएम), नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) और दूसरे प्रदूषकों को फैलाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। माल ढुलाई की बढ़ती मांग और तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण, हवा की गुणवत्ता तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने हेतु व्यावसायिक वाहनों के बेड़े को आधुनिक बनाना एक अहम प्राथमिकता बन गया है।

इस चुनौती से निपटने के उद्देश्य से, भारत सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में पुराने और अधिक उत्सर्जन करने वाले ट्रकों व बसों के स्थान पर स्वच्छ ‘भारत चरण (बीएस)-VI’ मानकों वाले एवं  इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने के लिए वाहनों के बेड़े के नवीनीकरण (व्हीकल फ्लीट रिन्यूअल) से संबंधित एक पहल को मंजूरी दी। 3 जून 2026 को केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई इस पहल का उद्देश्य वित्तीय प्रोत्साहन, नीतिगत समर्थन और समन्वित कार्यान्वयन के जरिए स्वच्छ आवागमन की दिशा में बदलाव की प्रक्रिया को तेज करना है।

बाद में इस पहल का नाम ‘परिवर्तन’ (प्रोग्राम फॉर एक्सीलरेटेड रिन्यूअल एंड इंसेंटिवाइजेशन  ऑफ व्हीकल एसेट्स फॉर रिड्यूसिंग ट्रांसपोर्ट एयर पोल्युशन एंड नेटवर्क एमिशन्स) रखा गया। यह पहल भारत सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत स्वच्छ और अपेक्षाकृत अधिक कुशल वाहन तकनीकों के जरिए भरोसेमंद परिवहन को बढ़ावा देने और क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता में सुधार करने का प्रयास किया जा रहा है।

स्वच्छ परिवहन हेतु एक व्यापक कार्यक्रम

‘परिवर्तन’ योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 9,585 करोड़ रुपये है। इसमें केन्द्र सरकार की ओर से प्रदत्त 5,041 करोड़ रुपये की सहायता शामिल है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) जहां इस योजना को कार्यान्वित करेगा, वहीं धनराशि आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और हरियाणा, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के एनसीआर वाले जिले शामिल हैं, ताकि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने हेतु एक समन्वित क्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाया जा सके। इसके पारदर्शी एवं कारगर कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु विस्तृत परिचालन दिशानिर्देशों को भी मंजूरी दी गई है।

अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को बदलना

यह योजना दिल्ली-एनसीआर में पंजीकृत उन व्यावसायिक ट्रकों और बसों से संबंधित है जो बीएस-IV या उससे पुराने प्री-बीएस, बीएस-I, बीएस-II और बीएस-III जैसे उत्सर्जन संबंधी मानकों का अनुपालन करते हैं।

इस कार्यक्रम के तहत 1.9 लाख से अधिक ट्रक और 16,000 से अधिक बसें पात्र हो सकती हैं, जिससे यह देश की व्यावसायिक वाहनों के आधुनिकीकरण की सबसे व्यापक योजनाओं में से एक बन जाएगी।

यह योजना मालिकों को पुरानी हो रहे वाहनों को हटाने और उनकी जगह स्वच्छ विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। इसका उद्देश्य परिवहन संबंधी उत्सर्जन को काफी हद तक कम करने के साथ-साथ सुरक्षित व ईंधन की दृष्टि से अधिक किफायती तकनीक को बढ़ावा देना है।

वित्तीय प्रोत्साहनों का एक ठोस पैकेज

वाहनों को बदलने की प्रक्रिया को आर्थिक रूप से लाभदायक बनाने हेतु, यह योजना उन पात्र  लाभार्थियों को प्रोत्साहन का एक पूरा पैकेज देती है जो बीएस-VI मानक का अनुपालन करने वाले डीजल/सीएनजी वाहन या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते हैं।

इसके लाभों में शामिल हैं:

  • मोटर वाहन कर में शत-प्रतिशत छूट
  • पंजीकरण शुल्क में शत-प्रतिशत छूट
  • वाहन ऋण पर ब्याज में 5 प्रतिशत की छूट
  • भाग लेने वाली ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चरर्स (ओईएम) की ओर से 8 प्रतिशत  तक की छूट
  • बीएस-VI मानक वाले डीजल और सीएनजी वाहनों के लिए मासिक ईंधन वाउचर
  • इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए समतुल्य एकमुश्त आर्थिक प्रोत्साहन

बीएस-VI मानक वाले उपयोग किए हुए वाहन खरीदने वाले लोगों को कर में छूट, ब्याज में छूट और ईंधन संबंधी प्रोत्साहनों के जरिए भी आर्थिक सहायता मिलेगी। इससे कम कीमत पर स्वच्छ तकनीक वाले वाहन खरीदना आसान हो जाएगा।

विद्युत आधारित आवागमन की दिशा में बदलाव को प्रोत्साहन

यह योजना शून्य-उत्सर्जन वाले वाहनों को अपनाने की गति बढ़ाने हेतु अतिरिक्त सहायता प्रदान करती है।

इलेक्ट्रिक व्यावसायिक वाहन खरीदने वाले मालिकों को भविष्य के ईंधन वाउचर के रियायती मूल्य (डिस्काउंटेड वैल्यू) के समतुल्य एक बार का प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे ईवी खरीदने की शुरुआती लागत काफी कम हो जाएगी।

बीएस-VI मानक वाले डीजल और सीएनजी वाहनों के संदर्भ में, लाभार्थियों को वाहनों की श्रेणी के आधार पर पांच वर्ष तक हर माह 1,200 रुपये से 4,800 रुपये तक के ईंधन वाउचर मिलेंगे।

इसके उलट, इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को 64,000 रुपये से 2.56 लाख रुपये तक का एकमुश्त प्रोत्साहन मिलेगा। इससे उन्हें तुरंत आर्थिक मदद मिलेगी और साथ ही स्वच्छ आवागमन की दिशा में तेजी से बदलाव को भी बढ़ावा मिलेगा।

वाहन मालिकों के लिए सुविधाजनक विकल्प

व्यावसायिक वाहनों के मालिकों की विभिन्न प्रकार की परिचालन संबंधी एवं वित्तीय स्थितियों को ध्यान में रखते हुए, यह योजना इसमें शामिल होने हेतु कई विकल्प प्रदान करती है।

पात्र मालिक ये कर सकते हैं:

  • अपने पुराने वाहन को पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केन्द्र (आरवीएसएफ) में स्क्रैप करवाएं और कार्यान्वित प्रोत्साहन का लाभ उठाएं।
  • पात्र बीएस-VI मानक वाले वाहनों को एनसीआर के बाहर, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) में शामिल न होने वाले निर्धारित शहरों में बेचें।
  • अगर वे नया वाहन नहीं खरीदना चाहते हैं, तो ‘सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट’ (सीडी) का लेन-देन (ट्रेड) कर सकते हैं।

ये सुविधाजनक विकल्प यह सुनिश्चित करते हैं कि लाभार्थी अपने कारोबार की जरूरतों के अनुरूप सबसे उपयुक्त समाधान को अपना सकें और साथ ही वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के बड़े उद्देश्य में भी योगदान दे सकें।

स्वच्छ आवागमन हेतु क्षेत्र-विशेष आधारित दृष्टिकोण

इस योजना में पर्यावरण संबंधी लाभों को अधिकतम करने हेतु क्षेत्र-विशेष आधारित प्रावधान शामिल हैं।

दिल्ली में, इस योजना के तहत बदले जाने वाले सभी माल ढोने वाले हल्के वाहन (एलजीवी) इलेक्ट्रिक होने चाहिए, जो शून्य-उत्सर्जन वाली शहरी माल ढुलाई के प्रति शहर की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में, लाभार्थी बीएस-VI मानकों वाले वाहनों और इलेक्ट्रिक वाहनों में से चुन सकते हैं, जिससे उन्हें अधिक सुविधाजनक विकल्प मिलने के साथ-साथ उत्सर्जन में भी काफी कमी आती है।

यह संतुलित दृष्टिकोण एनसीआर में पर्यावरण से जुड़ी प्राथमिकताओं और कामकाज की वास्तविकताओं के बीच संतुलन बिठाता है।

निर्बाध डिजिटल कार्यान्वयन

यह योजना एक विशिष्ट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म – ‘परिवहन परिवर्तन पोर्टल’ (https://parivartan.parivahan.gov.in) – के जरिए कार्यान्वित की जाएगी, जो लाभार्थियों को शुरू से अंत तक डिजिटल अनुभव प्रदान करेगा।

इस पोर्टल के जरिए, वाहनों के मालिक ये काम कर पाएंगे:

  • योग्यता की जांच
  • अपने वाहनों का पंजीकरण
  • प्रोत्साहनों के लिए आवेदन
  • आवेदन की स्थिति की निगरानी
  • योजना से जुड़ी जानकारी की प्राप्ति

इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को वाहन बदलने की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और आसानी से पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है।

एक सामूहिक प्रयास

‘परिवर्तन’ योजना को केन्द्र सरकार, राज्य सरकारों और ऑटोमोबाइल उद्योग के समन्वित  प्रयासों से लागू किया जा रहा है। इसमें शामिल राज्य, पात्र लाभार्थियों को दस वर्षों तक मोटर वाहन कर में शत-प्रतिशत तक की छूट और पंजीकरण शुल्क पूरी तरह से माफ करने की सुविधा देंगे।

‘परिवर्तन’ योजना को कारगर तरीके से लागू करने हेतु, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने 11 प्रमुख ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चरर्स (ओईएम) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन कंपनियों में अशोक लेलैंड, स्विच मोबिलिटी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एसएमएल महिंद्रा, डेमलर इंडिया कमर्शियल व्हीकल्स (डीआईसीवी), आइशर ट्रक्स एंड बसेस (वीईसीवी), फोर्स मोटर्स, पिनेकल मोबिलिटी सॉल्यूशंस, ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक लिमिटेड और मोंट्रा इलेक्ट्रिक (टीआई क्लीन मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड) शामिल हैं। ये सभी ओईएम मिलकर भारत के घरेलू ट्रक और बस बाजार में 95 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी करते हैं, जिससे पात्र स्वच्छ वाहनों की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित होती है।

इस योजना की देखरेख कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक अधिकार-प्राप्त समिति करेगी। इस समिति में नीति आयोग के सीईओ; एमओएचयूए, एमओआरटीएच, एमओपीएनजी एवं  डीएफएस के सचिव; दिल्ली-एनसीआर राज्यों के मुख्य सचिव; और सदस्य संयोजक के तौर पर एनसीआरपीबी के सदस्य सचिव शामिल होंगे। जिला स्तर पर, जिला कलेक्टर/ जिला मजिस्ट्रेट इसे कार्यान्वित करने में मदद करेंगे और इसकी प्रगति पर नजर रखेंगे।

स्वच्छ हवा और सतत विकास की ओर

‘परिवर्तन’ योजना सरकार की उस प्रयास में एक अहम उपलब्धि है, जिसका उद्देश्य स्वच्छ, अधिक टिकाऊ और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार परिवहन इकोसिस्टम का निर्माण करना है। वाहनों के बेड़े को आधुनिक बनाने और स्वच्छ तकनीक को अपनाने को बढ़ावा देकर, इस पहल के जरिए हवा की गुणवत्ता बेहतर होने और भारत के दीर्घकालिक पर्यावरण एवं सतत  विकास के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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