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क्लियर प्रौद्योगिकी से प्रोटीन इमेजिंग में क्रांति, कैंसर तथा तंत्रिका संबंधी रोगों का पता लगाने में भी आसानी

दिल्ली। क्लीवेबल लाइट-इरेज्ड एंटीबॉडी रिपोर्टर (क्लियर) नामक एक नवीन इमेजिंग प्लेटफॉर्म अनुसंधानकर्ताओं को केवल एक फ्लोरोसेंट मार्कर का उपयोग करके एक ही जैविक नमूने के भीतर अभूतपूर्व संख्या में प्रोटीन को देखने में मदद कर सकता है। इससे कोशिकाओं और ऊतकों में उच्च-रिजॉल्यूशन, मल्टीप्लेक्स इमेजिंग के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुल सकते हैं, जो रोगों के निदान और जैविक अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

प्रोटीन जैविक कार्यों के प्राथमिक नियंत्रक होते हैं और चिकित्सीय क्रियाकलाप के प्रमुख लक्ष्य होने के साथ-साथ रोगों के निदान के लिए महत्वपूर्ण संकेतक भी हैं। ऊतक के नमूने का एक व्यापक प्रोटिओमिक मानचित्र प्रत्येक प्रोटीन की पहचान और उसके मूल संदर्भ में सटीक स्थानिक संगठन को दर्शाता है। यह पेथोलॉजिस्ट को कैंसर के निदान या जटिल तंत्रिका संबंधी विकारों को समझने में मदद कर सकता है। हालांकि, बड़ी संख्या में प्रोटीनों को उनके मूल स्थानिक संदर्भ में मापन करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

इस चुनौती से पार पाने के लिए, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र, बेंगलुरु (जेएनसीएएसआर) के अनुसंधानकर्ताओं ने क्लियर नामक इमेजिंग प्लेटफॉर्म विकसित किया है। यह इमेजिंग प्लेटफॉर्म वैज्ञानिकों को एक ही फ्लोरोफोर का उपयोग करके एक ही जैविक नमूने के भीतर बड़ी संख्या में प्रोटीन को देखने में सक्षम बनाता है।

इससे उच्च रिजॉल्यूशन पर व्यापक प्रोटीन का मानचित्रण संभव हो सकता है, जिसमें कैंसर जीव विज्ञान, प्रतिरक्षा विज्ञान और तंत्रिका संबंधी रोगों जैसे क्षेत्रों में निदान को लेकर क्रांति लाने की क्षमता है, जहां प्रोटीन के स्थानिक संगठन को समझना महत्वपूर्ण है।

प्रो. सरित एस. अगास्ती के नेतृत्व वाली टीम ने क्लियर प्रोब्स को डिजाइन और संश्लेषित किया, इमेजिंग वर्कफ्लो विकसित किया और विभिन्न जैविक प्रणालियों में इस प्लेटफॉर्म का सत्यापन किया। प्रायोगिक डिजाइन, प्रोब रसायन विज्ञान और इमेजिंग विश्लेषण का कार्य इस समूह के भीतर ही किया गया। भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के अनुसंधानकर्ताओं के साथ सहयोगात्मक प्रयासों से जटिल जैविक परिस्थितियों, विशेष रूप से प्रतिरक्षा कोशिका प्रणालियों में इस प्लेटफॉर्म के निष्पादन में सहायता मिली।

उन्होंने एक लाइट-क्लिवेबल प्रोब प्रणाली प्रस्तुत की है जो एक ही स्पेक्ट्रल विंडो के भीतर लेबलिंग और इमेजिंग के रिपीट साइकल को सक्षम बनाती है। मौजूदा मल्टीप्लेक्सिंग तकनीकों से भिन्न, क्लियर उच्च मल्टीप्लेक्सिंग क्षमता को गति, उच्च स्थानिक रिजॉल्यूशन और जीवित कोशिकाओं सहित नाजुक जैविक नमूनों के साथ अनुकूलता के साथ जोड़ती है। यह दृष्टिकोण कई फ्लोरोफोर की आवश्यकता के बिना लगभग असीमित प्रोटीन विजुअलाइजेशन को सक्षम करके मल्टीप्लेक्स इमेजिंग को मौलिक रूप से पुनर्निर्धारित करता है।

केमिकल साइंस (रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री) पत्रिका में प्रकाशित नव विकसित विधि एक ब्लैकबोर्ड की तरह काम करती है। इस पर लिखी गई चीजों को मिटाकर नई चीजें लिखी जा सकती हैं। यह विधि वैज्ञानिकों को कोशिकाओं के भीतर रुचि के प्रोटीनों को क्लीवेबल फ्लोरोसेंट टैग का उपयोग करके लेबल करने में सक्षम बनाती है। माइक्रोस्कोप के नीचे प्रोटीनों के एक समूह की छवियां प्राप्त करने के बाद, फ्लोरोसेंट सिग्नल को मिटाने के लिए 365 एनएम एलईडी प्रकाश की एक हल्की पल्स दी जाती है। इससे उसी कोशिका में प्रोटीनों के एक नए समूह को लेबल किया जा सकता है और उसी ऑप्टिकल विंडो में उनकी तस्वीर ली जा सकती है। इस चक्र को बार-बार दोहराकर, एकल कोशिकाओं से लेकर जटिल ऊतक खंडों तक के नमूनों में कई प्रोटीनों के अधिक विस्तृत और पर्याप्त विवरण सहित मानचित्र तैयार किए जा सकते हैं।

क्लियर में कोशिकाओं और ऊतकों में प्रोटीन की विस्तृत मैपिंग को सक्षम बनाकर जैव चिकित्सा अनुसंधान और नैदानिक समाधान में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता है। इससे विशेष रूप से कैंसर और तंत्रिका संबंधी बीमारियों का शीघ्र पता लगाने में मदद मिल सकती है और प्रतिरक्षण पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने में सहायता मिल सकती है।

दीर्घकाल में, यह तकनीक लक्षित उपचारों को निर्देशित करने वाली व्यापक आणविक विवरण प्रदान करके सटीक चिकित्सा में योगदान दे सकती है। यह तकनीक स्थानिक प्रोटीओमिक्स और सटीक चिकित्सा की दिशा में वैश्विक प्रयासों के अनुरूप है।

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