
जगदलपुर । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर दौरे के दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा कि अब बस्तर में भय और बंदूकों के साए का दौर समाप्त हो चुका है और पूरा क्षेत्र खुली सांस लेकर विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक के बाद आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि देश के सभी आदिवासी संभागों में बस्तर सबसे समृद्ध क्षेत्र बनकर उभरेगा।
अमित शाह ने कहा कि बस्तर में लोगों के भीतर अब उत्साह, विश्वास और भविष्य को लेकर आश्वस्तता का माहौल दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू किया गया। उन्होंने 13 दिसंबर 2023 को राज्य में नई सरकार के गठन और 24 अगस्त 2024 को नक्सलवाद उन्मूलन की समयसीमा तय किए जाने को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों के साहस और बलिदान की बदौलत तय समयसीमा से पहले ही देश नक्सलवाद के आतंक से मुक्त हो गया। शाह ने कहा कि पहले यह धारणा बनाई जाती थी कि विकास की कमी के कारण नक्सलवाद पैदा हुआ, लेकिन वास्तविकता यह थी कि नक्सलवाद ही विकास में सबसे बड़ी बाधा बना रहा।
इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने “वीर शहीद गुण्डाधूर सेवा डेरा केंद्र” की शुरुआत को बस्तर के विकास का नया अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि पहले जिन शिविरों में सुरक्षा बल तैनात रहते थे, अब उनमें से 70 शिविरों को सेवा केंद्रों में बदला जाएगा। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को बैंकिंग, आधार, डिजिटल सेवाएं, स्वास्थ्य सुविधाएं, कौशल विकास और सरकारी योजनाओं का लाभ गांव स्तर पर उपलब्ध कराया जाएगा।
अमित शाह ने बस्तर के भविष्य का रोडमैप साझा करते हुए कहा कि हर परिवार को भैंस उपलब्ध कराने और सहकारी डेयरी व्यवस्था शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में 13 हजार मोबाइल टावर लगाए गए, 1804 बैंक खोले गए, 259 एकलव्य मॉडल स्कूल स्थापित किए गए और 90 हजार युवाओं का कौशल विकास किया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों में लाखों युवाओं की भागीदारी यह साबित करती है कि अब बस्तर हिंसा नहीं बल्कि विकास, शिक्षा और अवसरों की ओर बढ़ रहा है।


