
कांकेर वनमंडल में वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत न्यायालय के आदेश पर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार 8 मार्च 2026 की सुबह राज्य स्तरीय उड़नदस्ता को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई। सूचना मिलने पर कांकेर वन विभाग ने तत्काल टीम गठित कर विभिन्न स्थानों पर जांच और घेराबंदी की।
जांच के दौरान महेंद्र कोड़ोपी के घर के पीछे बाड़ी में दो जंगली सुअरों (एक नर 74 किलोग्राम और एक मादा 70 किलोग्राम) को पैरा जलाकर भुना जा रहा था। पूछताछ में बताया गया कि यह मांस ग्राम जुनवानी निवासी प्रकाश मंडावी से 300 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया था और इसे वाहन के माध्यम से देवकोंगेरा लाया गया था। वन विभाग ने मौके से जंगली सुअर का मांस और अन्य सामग्री जब्त कर वन अपराध प्रकरण दर्ज किया।
इसी दौरान मिली एक अन्य सूचना पर वन विभाग की टीम ने ग्राम माटवाड़ा (मोदी) के पास घेराबंदी कर पैशन प्रो मोटरसाइकिल (सीजी 19-बी-8847) को रोका। वाहन में सवार विष्णु सलाम और कृष्णा कोमरा एक जीवित मादा जंगली सुअर (लगभग 53 किलोग्राम) को चारों पैर और मुंह बांधकर ले जा रहे थे। पूछताछ में उन्होंने बताया कि यह जंगली सुअर ग्राम जुनवानी निवासी प्रकाश मंडावी से खरीदा गया था। वन विभाग ने जंगली सुअर को जब्त कर आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज किया।
इसके अलावा ग्राम जुनवानी में प्रकाश मंडावी के घर के पास भी वन विभाग की टीम ने छापेमारी की, जहां दो जंगली सुअरों को काटने का मामला सामने आया। मौके से जंगली सुअर के सिर और मांस के अन्य हिस्से बरामद किए गए। इस मामले में भी संबंधित आरोपियों के खिलाफ वन अपराध दर्ज किया गया।
वन विभाग ने सभी मामलों में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों को 8 मार्च 2026 को माननीय न्यायालय कांकेर के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
इस पूरी कार्रवाई में कांकेर वनमंडल के वन परिक्षेत्र अधिकारी कांकेर, वन परिक्षेत्र नरहरपुर के अधिकारी-कर्मचारी तथा मुख्य वन संरक्षक कांकेर के उड़नदस्ता दल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


