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छत्तीसगढ़राज्य

कोटा परिक्षेत्र में रात्रिकालीन गश्त में सागौन के लट्ठा जब्त

वनों की अवैध कटाई, अतिक्रमण और अवैध उत्खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई करके ही वनों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा की जा सकती है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को सुनिश्चित करके और प्रदेश और देश के हरित आंदोलन को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में शासन कार्य कर रही है।

कोटा परिक्षेत्र में रात्रिकालीन गश्त में सागौन के लट्ठा जब्त

प्रबंध संचालक  छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के निर्देशानुसार अवैध कटाई, अतिक्रमण एवं अवैध उत्खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सभी परियोजना मंडलों में नियमित भ्रमण तथा सामयिक एवं रात्रिकालीन गश्त की जा रही है। इस सतत कार्रवाई से वन क्षेत्रों की सुरक्षा में सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। इसी क्रम में 1 मार्च 2026 को सूचना प्राप्त होने पर कोटा परिक्षेत्र के अंतर्गत सेमरिया-दानोखार मार्ग, कक्ष क्रमांक पी/805 में रात्रिकालीन गश्त के दौरान टीम ने दबिश दी। कार्रवाई के दौरान वन अपराधी 2 पिकअप वाहन एवं सागौन के लट्ठे मौके पर छोड़कर फरार हो गए। आसपास के क्षेत्र में खोजबीन की गई, किंतु आरोपी पकड़ में नहीं आ सके।

मौके से एक पिकअप वाहन क्रमांक सीजी 13 एल 2428 (अनुमानित मूल्य 3 लाख रूपए) तथा अवैध कटाई से प्राप्त 10 नग सागौन लट्ठा (0.762 घनमीटर) जब्त कर प्रकरण क्रमांक 78/49, दिनांक 02.03.2026 दर्ज किया गया। इसी प्रकार एक अन्य पिकअप वाहन क्रमांक CG 10 AY 9034 (अनुमानित मूल्य 5 लाख रूपए) एवं 2 नग सागौन लट्ठा (0.107 घनमीटर) जब्त कर प्रकरण क्रमांक 78/48, दिनांक 02.03.2026 दर्ज किया गया। जब्त वनोपज का कुल अनुमानित मूल्य लगभग 40 हजार रुपए है।

यह कार्रवाई क्षेत्रीय महाप्रबंधक बिलासपुर अभिषेक सिंह एवं मंडल प्रबंधक कोटा परियोजना मंडल श्री सत्यदेव शर्मा के मार्गदर्शन तथा उपमंडल प्रबंधक आशुतोष सिंह के निर्देशन में संपन्न हुई। अभियान का संचालन परियोजना परिक्षेत्र अधिकारियों श्री विवेक देवांगन एवं श्री रवि कुमार जगत द्वारा किया गया। इस दौरान सहायक परियोजना क्षेत्रपाल एवं अन्य वन कर्मचारी तथा रोपण सुरक्षा श्रमिक सक्रिय रूप से शामिल रहे।

वन अपराध के विरुद्ध त्वरित और प्रभावी कार्रवाई पर प्रबंध संचालक श्री प्रेम कुमार ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी है। उन्होंने निर्देशित किया है कि निगम के सभी वन क्षेत्रों में इसी प्रकार सतर्कता के साथ कठोर कार्रवाई जारी रखी जाए। साथ ही आगामी गोपनीय प्रतिवेदन में वन सुरक्षा एवं संवर्धन में संबंधित अधिकारी/कर्मचारी की भूमिका का उल्लेख किए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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