
सुकमा। सुकमा जिले में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। माओवादी संगठन से जुड़े 22 सदस्यों ने पुलिस और प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। अधिकारियों के अनुसार, पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और क्षेत्र में तेज विकास कार्यों ने इस निर्णय में अहम भूमिका निभाई है।
पुनर्वास नीति और विकास कार्यों का प्रभाव
सरकार की पुनर्वास योजना ‘पूना मारगेम- पुनर्वास से पुनर्जीवन’ के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण और पुनर्वास सुविधाएं दी जा रही हैं। जिले में सड़कों के निर्माण, नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना और आधारभूत ढांचे के विस्तार से माओवादी प्रभाव में कमी आई है।
संयुक्त ऑपरेशनों से बढ़ा दबाव
पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त अभियानों से माओवादी संगठन पर लगातार दबाव बना है। सुरक्षा कैंपों की संख्या बढ़ने और जंगल क्षेत्रों में सघन सर्च ऑपरेशन के कारण संगठन की गतिविधियों में गिरावट दर्ज की गई है।
सुरक्षा बलों की अहम भूमिका
आत्मसमर्पण अभियान में जिला पुलिस, डीआरजी सुकमा, जिला बल सुकमा, आरएफटी जगदलपुर तथा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की विभिन्न बटालियनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अधिकारियों का कहना है कि लगातार संवाद और विश्वास निर्माण के प्रयासों से यह सफलता मिली है।
विकास की राह अपनाने का संकल्प
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने स्वीकार किया कि हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाना ही बेहतर विकल्प है। शासन की नीति के तहत सभी को निर्धारित प्रक्रिया में शामिल कर पुनर्वास लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।


