रायपुर, 21 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में आवासीय सुविधाओं के विस्तार और अधोसंरचना विकास को नई गति देने की दिशा में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने संपत्ति विक्रय के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा विकास कार्यों में गति, पारदर्शिता और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, विक्रय प्रक्रिया को सरल बनाने और हितग्राहियों की सुविधा को प्राथमिकता देने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है।
मंडल के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मात्र 2 वर्ष 8 माह की अवधि में 7,650 संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 2,869 संपत्ति रहा है। यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों के प्रदर्शन की तुलना में मंडल की विक्रय क्षमता में आई उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों की अवधि में मंडल द्वारा कुल 7,793 संपत्तियों का विक्रय किया गया था। इस दौरान वार्षिक औसत लगभग 1,559 संपत्ति रहा। इसके मुकाबले वर्ष 2024 से अगस्त 2026 की वर्तमान अवधि में वार्षिक औसत बढ़कर लगभग 2,869 संपत्ति हो गया है। अर्थात पिछले पांच वर्षों की तुलना में वर्तमान अवधि में मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय में लगभग 84 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
केवल संख्या नहीं, विक्रय मूल्य में भी बड़ी छलांग
मंडल की उपलब्धि केवल संपत्तियों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि संपत्ति विक्रय से प्राप्त राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मंडल द्वारा कुल 1,609.18 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 603 करोड़ रुपये रहा। वहीं वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों में कुल 1,362.21 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय हुआ था। इस अवधि में वार्षिक औसत विक्रय मूल्य 272.44 करोड़ रुपये रहा। वर्तमान अवधि में यह औसत बढ़कर लगभग 603 करोड़ रुपये हो गया है। इस तरह मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय मूल्य में पिछले पांच वर्षों की तुलना में दो गुने से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
ये आंकड़े बताते हैं कि मंडल द्वारा उपलब्ध संपत्तियों के प्रबंधन और विक्रय को लेकर अपनाई गई कार्ययोजना प्रभावी रही है। संपत्तियों के बेहतर उपयोग, मांग के अनुरूप विक्रय व्यवस्था, हितग्राहियों के लिए प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने तथा लंबित मामलों के निराकरण पर ध्यान देने से विक्रय गतिविधियों में तेजी आई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकास और सुशासन पर जोर
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ शासन की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। नागरिकों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध हों और सरकारी संस्थाओं की संपत्तियों का बेहतर उपयोग हो, इस दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गृह निर्माण मंडल की संपत्ति विक्रय में सामने आई यह वृद्धि इसी व्यापक दृष्टिकोण से जुड़ी हुई है। मंडल की संपत्तियों के प्रभावी उपयोग से एक ओर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों को आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं।
वित्त एवं आवास मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली
वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी द्वारा विभागीय संस्थाओं में कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। गृह निर्माण मंडल की संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और विक्रय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए भी इसी दृष्टिकोण के अनुरूप कार्य किया जा रहा है। मंडल द्वारा उपलब्ध संपत्तियों के विक्रय में तेजी के साथ-साथ बकाया मामलों के निराकरण और हितग्राहियों को राहत देने के लिए विशेष योजनाओं को भी प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण वन टाइम सेटलमेंट-2 (ओटीएस-2) योजना है।
ओटीएस-2 योजना से 1,584 संपत्तियों का निराकरण
मंडल द्वारा बकाया राशि के मामलों के समाधान और संपत्तियों के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से लागू की गई वन टाइम सेटलमेंट-2 छूट योजना को भी व्यापक सफलता मिली है। योजना के अंतर्गत 1 मार्च 2025 से वर्तमान दिनांक तक 1,584 संपत्तियों का विक्रय एवं निराकरण किया गया है। इन संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 238.67 करोड़ रुपये है।
ओटीएस-2 योजना के माध्यम से लंबे समय से लंबित बकाया मामलों के निराकरण का रास्ता आसान हुआ है। इससे हितग्राहियों को अपनी देनदारियों के समाधान का अवसर मिला, वहीं मंडल की संपत्तियों के प्रभावी उपयोग और वित्तीय प्रबंधन को भी मजबूती मिली है।
हितग्राही-केंद्रित व्यवस्था बनी बदलाव का आधार
गृह निर्माण मंडल की संपत्ति विक्रय में हुई वृद्धि के पीछे केवल अधिक संपत्तियों को बाजार में उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि हितग्राहियों की सुविधा को केंद्र में रखकर प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने का प्रयास भी महत्वपूर्ण है। आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के विक्रय में पारदर्शिता, सरलता और सुविधा पर जोर दिए जाने से नागरिकों के लिए संपत्ति खरीदने की प्रक्रिया अधिक सहज हुई है।
मंडल द्वारा संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के साथ उनकी मांग, स्थान और उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए विक्रय प्रक्रिया को गति देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे मंडल की उपलब्ध संपत्तियों का उपयोग बढ़ा है और नागरिकों को अपनी आवश्यकता के अनुरूप संपत्ति प्राप्त करने के अवसर भी मिले हैं।
आंकड़े बता रहे बदलाव की तस्वीर
यदि पिछले पांच वर्षों और वर्तमान अवधि के प्रदर्शन की तुलना की जाए तो मंडल की उपलब्धि स्पष्ट रूप से सामने आती है। वर्ष 2019 से 2023 के दौरान जहां पांच वर्षों में 7,793 संपत्तियों का विक्रय हुआ, वहीं वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक केवल 32 माह में 7,650 संपत्तियां विक्रय की जा चुकी हैं। इसी तरह संपत्ति विक्रय से प्राप्त राशि भी पांच वर्षों के 1,362.21 करोड़ रुपये की तुलना में वर्तमान 32 माह में 1,609.18 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इस तरह कम अवधि में लगभग पिछले पांच वर्षों के बराबर संपत्तियों का विक्रय और उससे भी अधिक मूल्य की संपत्तियों का विक्रय मंडल की कार्यप्रणाली में आए बदलाव को रेखांकित करता है।
आवास और अधोसंरचना विकास के लिए मजबूत आधार
गृह निर्माण मंडल का मूल उद्देश्य प्रदेश के नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ आवासीय एवं अधोसंरचनात्मक विकास को बढ़ावा देना है। संपत्ति विक्रय में आई तेजी से मंडल के संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होने के साथ भविष्य की आवासीय एवं विकास परियोजनाओं के लिए भी बेहतर आधार तैयार हो रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों और वित्त एवं आवास मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा “संपत्ति प्रबंधन से विकास की गति” की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। संपत्तियों का बेहतर उपयोग, लंबित मामलों का निराकरण, हितग्राहियों को सुविधाजनक सेवाएं और पारदर्शी विक्रय व्यवस्थाकृइन सभी प्रयासों का सम्मिलित प्रभाव मंडल के प्रदर्शन में दिखाई दे रहा है।
गृह निर्माण मंडल की यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि जब सरकारी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन, सरल प्रक्रिया और हितग्राही-केंद्रित दृष्टिकोण एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो उसका सीधा लाभ नागरिकों और विकास गतिविधियों को मिलता है। आने वाले समय में भी मंडल द्वारा पारदर्शी एवं सुविधाजनक व्यवस्था को और मजबूत करते हुए संपत्ति विक्रय को गति देने तथा प्रदेश में आवास एवं अधोसंरचना विकास को नई ऊंचाई देने के प्रयास जारी रहेंगे।


