
• ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम कानूनों का सैद्धांतिक अध्ययन नहीं बल्कि विद्यार्थियों को बाल संरक्षण की व्यावहारिक समझ प्रदान करना है : चांसलर श्री अभिषेक अग्रवाल
• यह पाठ्यक्रम युवाओं को ज्ञान के साथ संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास है: डॉ वर्णिका शर्मा
रायपुर, 10 अगस्त 2026। बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और संरक्षण को लेकर आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (PGDPCR) के नए बैच रक्षक का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (CGSCPCR) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। ‘रक्षक’ की विशेषता यह है कि छत्तीसगढ़ में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य के विश्वविद्यालयों के साथ समझौता कर एक साझा शैक्षणिक पहल के रूप में प्रारंभ किया है। मुख्य अतिथि डॉ वर्णिका शर्मा अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कहा कि कार्यक्रम का नाम ‘रक्षक’ केवल एक पाठ्यक्रम का नाम नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी है। आज बच्चों को हिंसा, शोषण, बाल श्रम, बाल विवाह, साइबर जोखिम और अन्य अनेक चुनौतियों से बचाने के लिए प्रशिक्षित एवं संवेदनशील मानव संसाधन की आवश्यकता है। ऐसे में यह पाठ्यक्रम युवाओं को ज्ञान के साथ संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास है। चांसलर श्री अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि रक्षक पाठ्यक्रम का उद्देश्य केवल बाल अधिकारों के कानूनों का सैद्धांतिक अध्ययन कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को बाल संरक्षण व्यवस्था की व्यावहारिक समझ प्रदान करना है। पाठ्यक्रम में बाल अधिकारों से जुड़े कानून, सरकारी योजनाएं, संबंधित संस्थाओं की कार्यप्रणाली, विभागीय प्रक्रियाएं तथा बाल संरक्षण इकाइयों के कार्यों की जानकारी के साथ व्यावहारिक अनुभव पर भी जोर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित उद्घाटन समारोह में कुलपति डॉ टी रामाराव ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा केवल कानून और संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे पाठ्यक्रम युवाओं को इस जिम्मेदारी के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। लॉ संकाय के डीन एवं पाठ्यक्रम के संचालन के अध्यक्ष डॉ के.सी. दलाई ने पाठ्यक्रम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राकृतिक न्याय, मौलिक अधिकार और मानवाधिकारों के अंतर्गत बच्चों के हितों की रक्षा के लिए अनेक संवैधानिक प्रावधान और कानून मौजूद हैं। लेकिन बाल अधिकार संरक्षण एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें कानून की जानकारी के साथ-साथ बच्चों की परिस्थितियों, उनकी जरूरतों, संरक्षण तंत्र और जमीनी स्तर पर होने वाली कार्यवाही की समझ भी आवश्यक है। इसी दृष्टि से यह महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम का संचालन लॉ विभाग की सहायक प्राध्यापक पलक ओटवानी ने किया और आभार एजुकेशन विभाग की सहायक प्राध्यापक कुमारी विद्याभूषण ने किया। पाठ्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर कार्यक्रम में महानिदेशक डॉ बीसी जैन, डायरेक्टर डॉ जयेंद्र नारंग, कुलसचिव डॉ रुपाली चौधरी, डायरेक्टर एकेडमिक डॉ संध्या वर्मा, सहित समस्त डीन, प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
बॉक्स न्यूज़ – 1
पाठ्यक्रम पूरा करने पर रोजगार के अवसर
यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को बाल अधिकारों की समझ के साथ-साथ रोजगार के नए अवसरों से भी जोड़ेगा। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद विद्यार्थी बाल संरक्षण इकाइयों, बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय से जुड़े संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों, बाल देखभाल संस्थानों, सामाजिक विकास परियोजनाओं तथा विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों में कार्य के अवसर तलाश सकेंगे।


